
Maniram Sen Story: जमीन में गड़ा हुआ खजाना, सोने के सिक्के और रातोंरात अमीर बनने का सपना… यही वह जाल था, जिसके सहारे मणिराम सेन लोगों को अपने भरोसे में लेता था.
Serial Killer Maniram Sen: जमीन में गड़ा हुआ खजाना, सोने के सिक्के और रातोंरात अमीर बनने का सपना… यही वह जाल था, जिसके सहारे मणिराम सेन लोगों को अपने भरोसे में लेता था. पहले वह खुद को तांत्रिक विद्या और गुप्त खजानों का जानकार बताता, फिर शिकरा को जंगलों में ले जाकर पूजा-पाठ के बहाने उसकी आंखों पर पट्टी बांध देता और उसके बाद बेरहमी से मौत के घाट उतार देता.
उसकी खौफनाक करतूतों की कहानी किसी थ्रिलर फिल्म जैसी लगती है, लेकिन यह हकीकत है. पुलिस ने तो आरोपी के ऊपर 20 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया था. साल 2021 में भोपाल पुलिस ने कई तरह की मसकत के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि आखिर यह रोंगटे खड़ कर देने वाला सीरियल किलर पुलिस के हत्थे कैसे चढ़ा और अब तक इस साइको किलर ने कितने लोगों को मौत के घाट उतारा.
छह साल पुराने मर्डर केस का खुलासा
करीब छह साल पहले सूखीनेवनिया थाना क्षेत्र के अब्दुल्ला बरखेड़ गांव के जंगल में आदिल वहाव नाम के युवक की हत्या कर दी गई थी. सुनसान जंगल में हुई इस वारदात के बाद पुलिस को कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला था, जिसके कारण मामला लंबे समय तक उलझा रहा. जांच के दौरान पुलिस ने 74 लोगों से पूछताछ की. आखिरकार सुराग मणिराम सेन तक पहुंचा और उसके बाद इस रहस्यमयी हत्याकांड का पर्दाफाश हो गया.
खजाने का लालच देकर लिए थे 17 हजार रुपये
पुलिस ने जब आरोपी को गिरफ्तार किया था तब उसने बताया था कि उसने आदिल वहाव को जमीन में गड़ा सोना दिलाने का झांसा दिया था. इसके लिए उसने उससे 17 हजार रुपये भी लिए थे. इतना ही नहीं, वह लगातार और पैसों तथा खजाने से जुड़ी मांगें कर रहा था. एक दिन वह आदिल को स्कूटी से सूखीसेवनिया के जंगल में ले गया. वहां उसने पहले पूजा-पाठ का नाटक किया और फिर आदिल की आंखों पर पट्टी बांध दी. जब युवक पूरी तरह उसके भरोसे में आ गया, तब मणिराम ने पत्थरों से कुचलकर उसकी निर्मम हत्या कर दी.
26 साल पहले भी रचा था खूनी खेल
यह पहली बार नहीं था जब मणिराम सेन का नाम हत्या के मामले में सामने आया था. करीब 26 साल पहले यानी साल 2000 में विदिशा जिले के ग्यासपुर क्षेत्र में उसने एक साथ पांच लोगों की हत्या कर सनसनी फैला दी थी. उस समय भी उसका तरीका लगभग यही था. वह लोगों को जमीन में गड़ा खजाना दिलाने का सपना दिखाता, उनसे पैसे ऐंठता और जब उन्हें शक होने लगता था पैसे वापस मांगने की नौबत आती, तो उन्हें सुनसान जगहों पर ले जाकर मौत के घाट उतार देता.
पांच लोगों की हत्या के बाद वह करीब डेढ़ साल तक फरार रहा था, बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई. सजा पूरी करने के बाद वह भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में रह रहा था, लेकिन उसके भीतर का अपराधी शांत नहीं हुआ और उसने फिर एक नई वारदात को अंजाम दे डाला.
मोबाइल से दूरी बनाकर पुलिस से बचता रहा
आदिल वहाव की हत्या के बाद मणिराम सेन भूमिगत हो गया था. पुलिस की नजरों से बचने के लिए उसने मोबाइल फोन रखना भी बंद कर दिया था. यही वज रही कि उसे पकड़ने में कई साल लग गए. हालांकि अब आरोपी जेल के सलाखों के पीछे है और सजा काट रहा है.



