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मैं स्कूलों और सचिवालय को बम से उड़ा दूंगा… पंजाब को ये धमकी देने वाला बांग्लादेशी निकला…

चंडीगढ़ पुलिस ने स्कूलों और पंजाब सिविल सचिवालय को ईमेल से बम धमकी देने वाले सौरव बिस्वास को गिरफ्तार किया है. पुल‍िस को जांच के दौरान पता चला है क‍ि आरोपी सौरव ब‍िस्‍वास पर कई साइबर केस, नेटवर्क की जांच पहले से चल रही है. बताया जा रहा है क‍ि वह बांग्‍लादेश का नागर‍िक है और पश्‍च‍िम बंगाल के जर‍िए भारत में एंट्री की थी.

पंजाब के स्‍कूलों और सच‍िवालय को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले को पुल‍िस ने अरेस्‍ट क‍िया ( फाइल फोटो)

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. स्कूलों और पंजाब सिविल सचिवालय को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी देने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया है. थाना सेक्टर-17 और थाना सेक्टर-3 की संयुक्त जांच में 30 वर्षीय सौरव बिस्वास को पकड़ा गया है.

28 जनवरी 2026 को टेंडर हार्ट स्कूल, जीएमएसएसएस सेक्टर-16, जीएमएसएसएस सेक्टर-35 और जीएमएसएसएस सेक्टर-19 को ई-मेल के माध्यम से बम धमकी मिली थी. इस पर थाना सेक्टर-17 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66(F) के तहत मामला दर्ज किया गया. अगले ही दिन 29 जनवरी 2026 को पंजाब सिविल सचिवालय को भी इसी तरह की धमकी भरी ई-मेल भेजी गई, जिसके बाद थाना सेक्टर-3, चंडीगढ़ में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई.

कैसे आरोपी तक पहुंची पुल‍िस

सौरव बिस्वास को चंडीगढ़ पुलिस ने किस आरोप में गिरफ्तार किया?

तकनीकी जांच और ई-मेल विश्लेषण के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची. जांच में सामने आया कि सौरव बिस्वास पश्चिम बंगाल का निवासी है, जो पहले बांग्लादेश से भारत आया था. इससे पहले गुजरात के अहमदाबाद स्थित साइबर क्राइम पुलिस उसे एक अन्य फर्जी बम धमकी मामले में गिरफ्तार कर चुकी है. चंडीगढ़ पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट लेकर 2 जून 2026 को उसे अपनी हिरासत में लिया और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड हासिल किया.

जांच में हुआ और क्‍या खुलासा?

जांच में खुलासा हुआ कि सौरव तकनीकी रूप से दक्ष फ्रीलांसर है, जो ऑनलाइन वेब डिजाइनिंग और एनीमेशन सेवाएं देता था. वह विभिन्न फेसबुक पेजों के माध्यम से जीमेल अकाउंट खरीदने और बेचने का काम भी करता था. आरोपी ने करीब 300 जीमेल अकाउंट खरीदे थे, जिनमें से 219 अकाउंट उसने बांग्लादेश के एक व्यक्ति को बेच दिए. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन अकाउंट्स का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही.

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