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कॉर्पोरेट जगत के लिए बड़ी खबर, SEBI ने मार्केट बायबैक नियमों में किया बदलाव

मार्केट रेगुलेटर SEBI ने शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंज के जरिए शेयर बायबैक को फिर से शुरू करने की मंजूरी दे दी. इससे कंपनियां 1 अगस्त से ओपन मार्केट में अपने शेयर वापस खरीद सकेंगी और इसके लिए 66 वर्किंग डेज की समयसीमा तय की गई है. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के इस कदम से कंपनियां बिना किसी खास बायबैक विंडो के रेगुलर ट्रेडिंग सिस्टम के जरिए बायबैक कर पाएंगी. इससे प्रक्रिया आसान होगी और पेपरवर्क भी कम होगा.

कॉर्पोरेट जगत के लिए बड़ी खबर, SEBI ने मार्केट बायबैक नियमों में किया बदलाव

बोर्ड मीटिंग में लिए गए इस फैसले का मकसद फ्लेक्सिबिलिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर बनाना है. साथ ही, इससे लिस्टेड कंपनियों के लिए कैपिटल एलोकेशन टूल के तौर पर बायबैक और ज्यादा आकर्षक बन सकता है. SEBI ने 2025 में ओपनमार्केट बायबैक को धीरेधीरे बंद कर दिया था. इसकी वजह शेयरहोल्डर्स के साथ असमान व्यवहार और टैक्स से जुड़ी गड़बड़ियों की चिंताएं थीं, क्योंकि इस सिस्टम को कुछ खास निवेशकों के पक्ष में माना जाता था.

क्या होता है बायबैक?

जब कोई कंपनी अपने ही शेयर बाजार से वापस खरीदती है, तो उसे बायबैक कहा जाता है. इसके बाद बाजार में कंपनी के कुल शेयरों की संख्या कम हो जाती है. कंपनी ऐसा तब करती है जब उसके पास अतिरिक्त कैश हो या उसे लगता हो कि उसके शेयर की कीमत वास्तविक मूल्य से कम आंकी जा रही है. बायबैक से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, प्रति शेयर कमाई में सुधार होता है और कई बार शेयर की कीमत को भी सपोर्ट मिलता है.

कई अन्य नियमों में भी बदलाव

सेबी ने नए नियमों में म्यूचुअल फंड के लिए उधार लेने के नियमों में ढील दी, सिक्योरिटीज ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान बनाया और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स के लिए ग्रीनचैनल सिस्टम को मंजूरी दी. बोर्ड ने SEBI सदस्यों के लिए एक नया कोड ऑफ कंडक्ट और SEBI नियम, 2001 में बदलावों को भी मंजूरी दी, ताकि हितों के टकराव और जानकारी साझा करने से जुड़े नियमों को और मजबूत किया जा सके.

ये बदलाव रेगुलेटर के गवर्नेंस सिस्टम की समीक्षा के लिए बनाई गई हाईलेवल कमेटी की सिफारिशों के आधार पर किए गए हैं. म्यूचुअल फंड के मामले में, SEBI ने इंट्राडे उधार लेने के नियमों में ढील दी है. इससे स्कीमों को रिडेम्पशन पेमेंट के अलावा कैश मैनेजमेंट की दूसरी जरूरतों के लिए भी इंट्राडे उधार लेने की सुविधा मिलेगी.

म्यूचुअल फंड्स को मिलेगी राहत

म्यूचुअल फंड नियम, 2026 में बदलाव के बाद म्यूचुअल फंड्स को इंट्राडे उधार लेने की इजाजत मिलेगी. इससे पेइन और पेआउट सेटलमेंट, विदेशी मुद्रा से जुड़ी देनदारियों और डेरिवेटिव पोजीशन पर मार्कटूमार्केट पेमेंट से जुड़े टाइमिंग मिसमैच को दूर किया जा सकेगा. SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि इस कदम का मकसद फंड मैनेजरों को रोजाना की लिक्विडिटी मिसमैच को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करना है. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसा उधार दिन खत्म होने से पहले चुका दिया जाए.

सिक्योरिटीज ट्रांसफर होगा आसान

बोर्ड ने निवेशक की मौत के बाद सिक्योरिटीज ट्रांसफर की प्रक्रिया को भी आसान बनाने के उपायों को मंजूरी दी है. इससे नॉमिनी और कानूनी वारिसों के लिए फाइनेंशियल एसेट्स पर दावा करना आसान और तेज हो जाएगा. रेगुलेटर ने कम वैल्यू वाले दावों के लिए ‘क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग’ नाम की नई कैटेगरी शुरू की है. नए फ्रेमवर्क के तहत QTP सुविधा फिजिकल सिक्योरिटीज के लिए 10,000 रुपये तक और डीमैट सिक्योरिटीज के लिए 30,000 रुपये तक के दावों पर उपलब्ध होगी. इसके अलावा, आसान डॉक्यूमेंटेशन के जरिए ट्रांसमिशन की लिमिट को दोगुना कर दिया गया है. अब फिजिकल होल्डिंग्स के लिए यह सीमा 10 लाख रुपये और डीमैट होल्डिंग्स के लिए 30 लाख रुपये होगी.

AIF सेक्टर को मिलेगा बूस्ट

बोर्ड ने ‘GARUDA’ नाम के नए ग्रीनचैनल मैकेनिज्म को मंजूरी दी है. इसका मकसद AIF स्कीम लॉन्च करने की प्रक्रिया को तेज करना है. इस फ्रेमवर्क के तहत योग्य AIF स्कीम प्लेसमेंट मेमोरेंडम फाइल करने के 10 वर्किंग डेज के भीतर फंड जुटाना शुरू कर सकेंगी, जबकि पहले इसके लिए 30 दिन तक इंतजार करना पड़ता था. SEBI का मानना है कि इससे AIF इंडस्ट्री में पूंजी का इस्तेमाल ज्यादा तेजी और कुशलता से हो सकेगा.

31 मार्च 2026 तक देश में रजिस्टर्ड AIF की संख्या 1,849 थी, जबकि कुल कमिटमेंट 15.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था. सिर्फ एक्रेडिटेड निवेशकों वाली स्कीम और एंजेल फंड्स के लिए रेगुलेटर ने मर्चेंट बैंकर के जरिए प्लेसमेंट मेमोरेंडम फाइल करने की जरूरत भी खत्म कर दी है. अब ऐसी स्कीम डॉक्यूमेंट जमा करते ही लॉन्च हो सकेंगी, बशर्ते फंड मैनेजर जरूरी अंडरटेकिंग दें.

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