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मार्कशीट से ‘इंडिया’ की छुट्टी! देश के कई विश्वविद्यालयों ने अपनाया ‘भारत’, लिया अहम फैसला..

मार्कशीट से ‘इंडिया’ की छुट्टी! देश के कई विश्वविद्यालयों ने अपनाया ‘भारत’, लिया अहम फैसला..

देश की शिक्षा व्यवस्था और उच्च शिक्षण संस्थानों से एक बेहद दिलचस्प और बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। भारत के कई कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज ने अब छात्रों को मिलने वाली डिग्री, मार्कशीट और अन्य जरूरी शैक्षणिक दस्तावेजों में ‘India’ शब्द की जगह ‘Bharat’ शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालयों द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद अब शिक्षा जगत और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा संगठन ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ काफी लंबे समय से देश के सभी सरकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों में ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ नाम को प्राथमिकता देने की पुरजोर वकालत कर रहा है। संगठन का यह प्रयास अब रंग लाता हुआ दिखाई दे रहा है, क्योंकि कई प्रतिष्ठित संस्थानों ने इसे अपने स्तर पर लागू करना शुरू कर दिया है।

देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की कोशिश

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का इसके पीछे यह तर्क है कि ‘भारत’ शब्द हमारे देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान को कहीं बेहतर और गहराई से दर्शाता है। इसी सोच और विचारधारा को ध्यान में रखते हुए देश के कई उच्च शिक्षण संस्थानों ने अपने दीक्षांत समारोहों में बांटी जाने वाली डिग्रियों और आधिकारिक दस्तावेजों के प्रारूप में यह बड़ा बदलाव करना शुरू किया है।

इस बदलाव का समर्थन करने वाले लोगों का साफ कहना है कि यह कदम हमारी भारतीय परंपरा, जड़ों और राष्ट्रीय पहचान को और ज्यादा मजबूत करेगा। दूसरी ओर, इस फैसले के आलोचकों का मानना है कि जब हमारे देश के संविधान में साफ़-साफ़ “India, that is Bharat” लिखा हुआ है और दोनों ही नाम पूरी तरह से मान्य हैं, तो फिर किसी एक नाम को अलग से बढ़ावा देने की कोई खास जरूरत नहीं है।

शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता लाने का बड़ा अभियान

अगर पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रमों पर नजर डालें, तो शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता, स्थानीय भारतीय भाषाओं और हमारे पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने से जुड़े कई बड़े अभियानों को लगातार आगे बढ़ाता रहा है। इस संगठन का स्पष्ट तौर पर मानना है कि हमारी शिक्षा प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था में ‘भारत’ शब्द का जितना अधिक उपयोग किया जाएगा, वह देश की सांस्कृतिक संप्रभुता और पहचान को उतना ही ज्यादा शक्तिशाली बनाएगा।

इस बीच, देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों द्वारा चुपचाप किए जा रहे इन बड़े बदलावों ने अब राजनीतिक हलकों में भी एक नई चर्चा छेड़ दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में देश के अन्य सभी सरकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों में भी ‘भारत’ शब्द का इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर बढ़ता हुआ देखा जा सकता है।

इंदौर की इस यूनिवर्सिटी ने की सबसे पहले शुरुआत

आपको याद होगा कि देश में आयोजित हुए भव्य जी-20 (G-20) समिट के दौरान भी आधिकारिक तौर पर इसी ‘भारत’ शब्द का प्रमुखता से इस्तेमाल किया गया था, जिसके बाद इस पर देशव्यापी चर्चा शुरू हुई थी। समर्थकों का कहना है कि हम सब भारत के लोग हैं और हमारे देश का असली व प्राचीन नाम भारत ही है, इसलिए इसे दस्तावेजों में जगह मिलनी ही चाहिए।

इस नए चलन को अपनाने के मामले में मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित देवी अहिल्याबाई होल्कर यूनिवर्सिटी का नाम सबसे आगे आ रहा है। बताया जा रहा है कि यह देश की ऐसी पहली यूनिवर्सिटी बन गई है जिसने अपनी डिग्रियों में ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ शब्द के इस्तेमाल की सबसे पहले आधिकारिक शुरुआत की है। इंदौर की इस यूनिवर्सिटी के अलावा अब छत्तीसगढ़ की भी कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज अपनी मार्कशीट और प्रमाणपत्रों में ‘इंडिया’ शब्द को हटाकर उसकी जगह ‘भारत’ शब्द का धड़ल्ले से यूज कर रही हैं।

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