भारतीय रिजर्व बैंक आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रख सकता है. ग्लोबल स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद भूराजनीतिक अनिश्चितता कम हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक को जल्दबाजी में कोई कदम उठाने की जरूरत नहीं दिख रही. ब्रोकरेज फर्म BofA Securities का मानना है कि RBI फिलहाल वेट एंड वॉच यानी इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाए रखेगा.

BofA Securities की रिपोर्ट के अनुसार, जून मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद आर्थिक माहौल पहले की तुलना में अधिक स्थिर हुआ है. हालांकि फूड पदार्थों और ईंधन की कीमतों में उतारचढ़ाव अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया है कि महंगाई पर कुछ जोखिम बने हुए हैं, लेकिन फिलहाल कोर इंफ्लेशन नियंत्रण में है. रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय बैंक मानसून की स्थिति, खाद्य कीमतों और कच्चे तेल के रुझानों पर नजर बनाए रखेगा. इन कारकों का असर साफ होने के बाद ही भविष्य में किसी नीति बदलाव पर विचार किया जा सकता है.
विकास दर का अनुमान घटाया
जून की MPC बैठक में सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बनाए रखने का फैसला किया था. RBI ने अपनी न्यूट्रल नीति का रुख भी बरकरार रखा. हालांकि वित्त वर्ष 202627 के लिए आर्थिक विकास दर का अनुमान 30 बेसिस पॉइंट घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया गया. इसके साथ ही मौसम से जुड़े जोखिमों को देखते हुए महंगाई का अनुमान 50 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया गया है. समिति के सदस्यों ने माना कि वैश्विक हालात और महंगाई का दबाव अभी भी चुनौती बने हुए हैं.
MPC सदस्यों ने दिखाई सतर्कता
आंतरिक सदस्यों ने समय से पहले ब्याज दर बढ़ाने के खिलाफ सावधानी बरतने की बात कही. उनका मानना है कि मौजूदा महंगाई मुख्य रूप से सप्लाई से जुड़े कारणों और आयातित लागत बढ़ने की वजह से है. ऐसे में जल्दबाजी में सख्ती करने से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है. वहीं, बाहरी सदस्यों ने भी आर्थिक विकास को समर्थन देने की जरूरत पर जोर दिया. उनका कहना था कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भविष्य में महंगाई बढ़ा सकती हैं, लेकिन फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आवश्यकता नहीं है. BofA Securities के अनुसार जून में MPC का रुख न तो बहुत सख्त था और न ही अत्यधिक नरम. समिति का झुकाव तटस्थ से हल्का नरम बना हुआ है. ऐसे में निकट भविष्य में रेपो रेट में बढ़ोतरी की संभावना कम नजर आती है और ब्याज दरें 5.25 फीसदी पर ही बनी रह सकती हैं.



