सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अगले सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता अहम भूमिका निभा सकती है. स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित इस बातचीत में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के ईरानी अधिकारियों के साथ चर्चा करने की संभावना है. दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयासों को बाजार करीब से देख रहा है.

एक्सपर्ट का कहना है कि यदि बातचीत पॉजिटिव रहती है तो निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ सकता है. इससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग कमजोर पड़ सकती है. वहीं, किसी भी तरह की अनिश्चितता या तनाव बढ़ने की स्थिति में सोने को समर्थन मिल सकता है.
कच्चे तेल और होर्मुज स्ट्रेट पर भी फोकस
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के उपाध्यक्ष प्रणव मेर के अनुसार बाजार की निगाह होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई पर भी रहेगी. यह मार्ग ग्लोबल ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है. इसका असर ग्लोबल महंगाई और निवेशकों की धारणा पर पड़ेगा, जिससे सोनेचांदी की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.
पिछले सप्ताह क्यों गिरे सोनेचांदी के दाम?
पिछले सप्ताह मजबूत रुपये और कमजोर मांग के कारण सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का वायदा भाव 3,325 रुपये यानी 2.2 प्रतिशत गिरकर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. वहीं चांदी का वायदा भाव 13,001 रुपये यानी 5.3 प्रतिशत टूटकर 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया.
डॉलर और फेडरल रिजर्व का भी रहेगा असर
एलकेपी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी के मुताबिक मजबूत रुपया और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है. मजबूत रुपया आयातित सोने की लागत कम कर देता है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें नरम पड़ती हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत डॉलर की वजह से बहुमूल्य धातुओं पर दबाव बना हुआ है. हालांकि रूसयूक्रेन युद्ध से जुड़ी चिंताएं सोने को कुछ हद तक सहारा दे रही हैं.
क्या है आगे का संकेत?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले सप्ताह सोने और चांदी की चाल मुख्य रूप से भूराजनीतिक घटनाक्रम, ऊर्जा बाजार और डॉलर की दिशा पर निर्भर करेगी. यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो सोने में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ सकती है. वहीं तनाव कम होने, डॉलर मजबूत रहने और रुपये में मजबूती आने पर कीमतों में दबाव बना रह सकता है.



