
बिहार में एक बार फिर कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित बिलोटी गांव के रहने वाले युवक भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद अब आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है. इस मामले में अब पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. सवाल उठाया जा रहा है कि क्या भरत तिवारी का यह एनकाउंटर असली था, या फिर यह एक सोची-समझी और सुनियोजित हत्या थी.
परिजनों का आरोप- ‘सरेंडर के बाद मारी गई गोली’
दरअसल, भरत तिवारी के परिजनों और विरोधियों का सीधा आरोप है कि भरत ने पुलिस के सामने पूरी तरह सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर दिया था. इसके बावजूद उन्हें पुलिस द्वारा गोली मार दी गई. यह आरोप इस पूरे मामले को बेहद संदिग्ध और संवेदनशील बना देता है. आरोप लगाया जा रहा है कि यह एनकाउंटर नहीं बल्कि कानून की आड़ में की गई गुंडागर्दी है.
सड़कों पर उतरी प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’
इस कथित एनकाउंटर के विरोध में रविवार को राजधानी पटना के कारगिल चौक पर प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ ने मोर्चा खोल दिया. जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर एक विशाल कैंडल मार्च निकाला और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में जो बैनर थे, वे सरकार और पुलिस प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा कर रहे थे. बैनरों पर साफ तौर पर लिखा था:



