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‘मां…आपको मेरी याद नहीं आती…’ बेटी के फोन पर बेंगलुरु से आई मनीष पति की खौफनाक साजिश का शिकार हो गई

Manisha Murder Case: बागपत में एक पति ने पत्नी को जन्मदिन मनाने के बहाने घर बुलाया और फिर उसकी हत्या कर दी. आरोप है कि बेटी से फोन करवाकर मां को बुलाया गया. पत्नी बेंगलुरु से बच्चों के साथ खुशियां मनाने आई थी, लेकिन घर के अंदर उसका इंतजार मौत कर रही थी.

‘मां…आपको मेरी याद नहीं आती…’ बेटी के फोन पर बेंगलुरु से आई मनीष पति की खौफनाक साजिश का शिकार हो गई

उत्तर प्रदेश के बागपत में एक पति ने पत्नी के जन्मदिन से पहले ही खौफनाक साजिश रच उसकी जान ले ली. साजिश में आपनी मासूम को मोहरा बनाया. पति ने बेटी से मां को फोन कराया. बेटी ने फोन पर मां से कहा- ‘मां आपको मेरी याद नहीं आती’. बेटी की जुबान से ये शब्द सुनते ही  मनीषा बेंगलुरु से बागपत चली आई. वो बच्चों के साथ 24 जून को अपना बर्थडे सेलिब्रेट करने की योजना के साथ आई थी. वो बेटी से मिलने के लिए बहुत एक्साइटेड थी. पर उसे क्या पता था कि जिस घर में वो इतनी सारी खुशियां समेटने जा रही है वहां मौत उसका इंतजार कर रही है. जैसे ही मनीषा घर में एंटर हुई तो पति उसपर टूट पड़ा. उसने साइकिल से चेन से बने एक हथियार की मदद से पत्नी का बेरहमी से कत्ल कर दिया. 

बागपत के चांदीनगर थाना इलाके के खैला गांव की इस घटना ने सनसनी फैला दी है. साथ ही पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को भी शर्मसार कर दिया है. 8 साल पहले जो राहुल भाटी मनीषा ठाकुर के बिना एक पल भी नहीं रह पाता था. मनीषा भी राहुल को पाने के लिए अपना सबकुछ कुर्बान करने को तैयार थी, फिर इस प्यार को किसकी नजर लग गई? दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ कि पति ने पत्नी का जन ही ले ली. इस कहानी में आपको हरिद्वार ले चलते हैं क्योंकि मनीषा और राहुल भाटी की पहली मुलाकात वहीं हुई थी.

हरिद्वार में मिले दोनों और हो गया प्यार

करीब 8 साल पहले ऑटोरिक्शा चलाने वाले राहुल भाटी की मुलाकात मनीषा ठाकुर से हुई. पहले बात हुई…फिर बातें होने लगीं और कब प्यार हो गया पता भी नहीं चला. दोनों शादी करने की ठान ली. दोनों ने 7 फेरे लेकर 7 जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाईं और राहुल के गांव बागपत आकर रहने लगे. इस दौरान दोनों को एक बेटा और बेटी हुई. अब बच्चों की परवरिश और घर चलाने की चुनौतियों ने जब परेशान किया तो दोनों बच्चों को लेकर दिल्ली आ गए. दिल्ली में राहुल ऑटोरिक्शा चलाने लगा और मनीषा एक निजी कंपनी में काम करने लगी. पारिवारिक परिस्थितियों के चलते मनीषा और राहुल की बेटी अपनी दादी के पास बागपत रहने लगी. मनीषा ने बेंगलुरु की एक कंपनी में अच्छी सैलरी पर नौकरी कर ली और वो बेटे के साथ वहीं जाकर रहने लगी. इधर राहुल हरिद्वार वापस चला गया और ऑटोरिक्शा चलाने लगा.

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