दक्षिण के राज्यों में समंदर के किनारे दूर तक नारियल के पेड़ नजर आते हैं. लम्बे नारियल के पेड़ समुद्र की ओर झुके नजर आते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नारियल के पेड़ ज्यादातर समुद्र के किनारे ही क्यों नजर आते हैं. पहाड़ी इलाके या शहर के बीचोंबीच क्यों नहीं. इसके पीछे एक नहीं, कई कारण हैं,

समुद्र के किनारे नारियल का पेड़ उगने की सबसे बड़ी वजह है इसका बीज. नारियल का कठोर खोल इसे पानी में तैरने में मदद करता है. जब भी कोई नारियल नीचे गिरता है और समुद्र की लहरें उसे बहा ले जाती हैं और वो सैकड़ों और हजारों किलोमीटर दूर पहुंच जाता है. वो जब किनारे पर पहुंचता है तो अंकुरित होकर नया पेड़ बन जाता है.
विज्ञान की भाषा में इसे हाइड्रोकोरी कहते हैं. जब पानी के जरिए बीज फैलता है और उससे पेड़ विकसित होता है. यही हाइड्रोकोरी प्रक्रिया है. दिलचस्प बात है कि सैकड़ों किलोमीटर तक फल तैरने के बाद भी यह सड़ता नहीं है. यही वजह है कि दुनिया के हर उष्णकटिबंधीय देश के समुद्री तट पर नारियल के पेड़ मिलते हैं.
नारियल की पैदावार में कर्नाटक सबसे आगे है. फोटो: Pexels
समंदर के किनारे की धूप भी बड़ी वजह
समुद्र के किनारे रेतीली और सॉल्टी मिट्टी होती है. ये नारियल के पेड़ों के लिए बेहतर होती है और किनारे पर मिलने वाली धूप पेड़ की बढ़त के लिए बेहतर मानी जाती है. पौधे की पत्तियां सोलर पैनल की तरह होती हैं. जितनी ज्यादा धूप पर पड़ती है पौधे को उतना ही फायदा होता है. इनमें बढ़ोतरी होती है.
दिलचस्प बात है कि नारियल के पेड़ों को बहुत अधिक उपजाऊ मिट्टी की जरूरत नहीं होती. समुद्र के किनारे की रेतीली मिट्टी इसकी जड़ों को नम रखती है. इसकी जड़ों को ऐसी मिट्टी की जरूरत नहीं होती जहां पानी ज्यादा इकट्ठा रहे. ये पेड़ जमीन से जल हासिल करने में सक्षम होते हैं, इसलिए इन्हें सिर्फ नमी और पोषण देने के लिए मिट्टी की जरूरत होती है.
यही नहीं समुद्री लहरों के जरिए किनारों पर लाई गई मिट्टी में कई तरह के पोषक होते हैं जो नारियल के पेड़ की ग्रोथ को बेहतर बनाते हैं.
न नमी की कमी, न पानी की
समुद्री किनारों पर होने के कारण यहां की नमीयुक्त हवा पेड़ों तक पहुंचती है. लहरों से पानी पहुंचता है और गहरी जड़ें भी पानी खींच लाती हैं. जिससे इनकी पानी की जरूरत आसानी से पूरी हो जाती है.
फोटोट्रॉपिज्म के कारण यह पेड़ रोशनी की तरफ झुकते हैं.
इसलिए समुद्र की तरफ झुकते हैं
अधिकतर पेड़ों के तने हवा से दूर झुकते हैं यानी हवा की विपरीत दिशा में. लेकिन नारियल का पेड़ हवा की तरफ झुकता है. फोटोट्रॉपिज्म के कारण यह पेड़ रोशनी की तरफ झुकते हैं. यही वजह है कि नारियल के पेड़ समुद्र की तरफ से ही सबसे ज़्यादा खुला आसमान और रोशनी मिलती है और इस ओर झुके रहते हैं.
समुद्र किनारे नारियल के पेड़ों की ऊंची दीवार तटीय वनों को तूफान और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तेज़ हवाओं से बचाती है. यानी ये पेड़ न सिर्फ खुद मजबूत हैं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी करते हैं.
नारियल पानी. फोटो: Pexels
क्या इसे सिर्फ समुद्र किनारे की उगा सकते हैं?
नहीं, ऐसा नहीं है कि इसे सिर्फ समुद्र किनारे ही उगा सकते हैं. पहली बात है कि इसे तटीय क्षेत्रों में ही उगाते हैं. इसे नमी वाली दूसरी जगह पर उगा सकते हैं, लेकिन वहां कोको पीट को जड़ों के पास रखा जाता है ताकि नमी बरकरार रहे. जो केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के इलाकों में नारियल के बागान में मिलती है.



