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ITR में नहीं बताई विदेशी कमाई या बैंक खाते की डिटेल, तो लगेगा ₹10 लाख का भारी जुर्माना!

नौकरी या बिजनेस के सिलसिले में अक्सर लोग भारत से बाहर जाते हैं. कुछ सालों तक विदेश में काम करने के बाद जब वे स्वदेश लौटते हैं, तो उनकी एक आर्थिक दुनिया वहां भी बस चुकी होती है. वहां खरीदे गए घर, विदेशी बैंक अकाउंट या फिर किसी विदेशी कंपनी के शेयर, ये सभी आपकी कुल संपत्ति का अहम हिस्सा होते हैं. लेकिन, इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय इन विदेशी संपत्तियों की जानकारी छिपाना आपको बहुत बड़ी कानूनी मुसीबत में डाल सकता है. टैक्स नियमों के मुताबिक, अगर किसी भी भारतीय टैक्सपेयर की विदेश में कोई संपत्ति या आय है, तो उसे अपने रिटर्न में इसकी पूरीपूरी जानकारी देनी होगी. ऐसा न करने पर ब्लैक मनी कानून के तहत 10 लाख रुपये तक का भारीभरकम जुर्माना लगाया जा सकता है.

ITR में नहीं बताई विदेशी कमाई या बैंक खाते की डिटेल, तो लगेगा ₹10 लाख का भारी जुर्माना!

विदेश की कमाई छिपाना अब नामुमकिन

आज के डिजिटल और कनेक्टेड युग में टैक्स चोरी करना या अपनी संपत्ति छिपाना लगभग असंभव हो गया है. टैक्स एक्सपर्ट्स बताते हैं कि भारतीय आयकर विभाग की नजर अब देश के साथसाथ विदेशों में मौजूद आपकी संपत्तियों पर भी है. दरअसल, भारत सरकार का दुनिया के कई देशों के साथ सीधा सूचना समझौता है. इसके तहत विदेशी सरकारें और वहां के वित्तीय संस्थान सीधे तौर पर भारतीय आयकर विभाग के साथ डाटा साझा करते हैं.

इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर आपका किसी दूसरे देश में कोई बैंक खाता है, रियल एस्टेट में निवेश है या फिर आपने विदेशी शेयर बाजार में पैसा लगा रखा है, तो विभाग के पास पहले से ही उसकी भनक होती है. ऐसे में रिटर्न फाइल करते समय इन जानकारियों को गोलमोल करना आपके लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है.

विदेशी कंपनियों के शेयर पर क्या हैं नियम?

अगर आप किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं और आपको कंपनी की तरफ से रिवॉर्ड के तौर पर शेयर मिले हैं, तो यह टैक्स का यह नियम आप पर भी पूरी तरह से लागू होता है. एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के फाउंडिंग पार्टनर हिमांग सिंगला इस मामले में स्पष्ट राय रखते हैं. उनका कहना है कि अगर कर्मचारियों के पास किसी भी विदेशी कंपनी के ईसॉप्स , आरएसयू या फिर सामान्य शेयर मौजूद हैं, तो उसकी जानकारी आयकर विभाग को देना अब अनिवार्य हो गया है.

सिर्फ शेयर ही नहीं, अगर आपको भारत के बाहर से किसी भी प्रकार की कमाई हो रही है या आपने किसी विदेशी म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रखा है, तो उसे भी अपनी आईटीआर में डिक्लेयर करना ही होगा. इसे नजरअंदाज करना आयकर नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा.

10 लाख रुपये का जुर्माना

अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि अगर कोई टैक्सपेयर जानबूझकर या अनजाने में इन विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं करता है, तो क्या होगा? इसका जवाब बेहद सख्त है. आयकर विभाग ऐसे मामलों में टैक्सपेयर के खिलाफ सीधे ‘ब्लैक मनी’ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई कर सकता है.

विदेशी संपत्ति और आय को छिपाने के अपराध में टैक्सपेयर पर 10 लाख रुपये तक की सीधी पेनाल्टी लगाई जा सकती है. बात सिर्फ आर्थिक जुर्माने तक ही सीमित नहीं रहती. अगर मामला गंभीर पाया जाता है और अघोषित संपत्ति की रकम बहुत बड़ी होती है, तो संबंधित व्यक्ति को लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है. इसमें जेल जाने तक का सख्त प्रावधान शामिल है. इसलिए, अपनी आईटीआर फाइल करते समय विदेशी बैंक खाते से लेकर निवेश तक का हर एक ब्यौरा पूरी ईमानदारी से दर्ज करना ही समझदारी है.

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