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कोलकाता गोदाम हादसा: मलबे में दबी उम्मीदें, 10 जिंदगियों के बुझने से मातम और जारी है संघर्ष

कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम के ढहने से उत्पन्न हुई त्रासदी ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। मौत का तांडव ऐसा मचा कि देखते ही देखते एक निर्माणाधीन ढांचा कब्रगाह में बदल गया, जिसमें अब तक 10 लोगों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है। हादसे के दूसरे दिन भी मलबे के ढेर में दबी किसी सांस की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी शिद्दत के साथ जारी है। इस मलबे के नीचे से अब तक 30 लोगों को जीवित बाहर निकाला जा चुका है, जो इस विनाशकारी घटना के बीच उम्मीद की एकमात्र किरण बने हुए हैं।

कोलकाता गोदाम हादसा: मलबे में दबी उम्मीदें, 10 जिंदगियों के बुझने से मातम और जारी है संघर्ष

हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना की उन्नत ‘ग्राउंडपेनिट्रिंग रडार’ प्रणाली को तैनात किया गया है, जो मलबे की परतों के नीचे दबे लोगों की धड़कन और हलचल को पहचानने में सक्षम है। राज्य सरकार और नागरिक प्रशासन के शीर्ष अधिकारी खुद राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। एसएसकेएम अस्पताल के ट्रामा सेंटर में 19 घायलों का उपचार चल रहा है, जहां गुरुवार की सुबह एक और पीड़ित ने दम तोड़ दिया। प्रशासन अत्याधुनिक कैमरों और मोबाइल टावर डेटा की मदद से मलबे के नीचे फंसे अन्य संभावित पीड़ितों तक पहुंचने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास कर रहा है।

इस हृदयविदारक घटना में मरने वालों में कृष्णा चौधरी, रोहित चौधरी, राहुल चौधरी, चंद्रिमा चौधरी, पप्पू रज्जाक, अजगर हुसैन, साहिल सरदार, घी कुमार सहित 10 लोग शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 22 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिवार को 10 लाख रुपये और घायलों को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है।

इस मामले में पुलिस ने कठोर रुख अपनाते हुए आपराधिक जांच शुरू कर दी है और ‘गैरइरादतन हत्या’ सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। अब तक गोदाम के मालिक शंभूनाथ बेहरा, संरचनात्मक इंजीनियर कमल सामंत, अयान ट्रेडर्स के पर्यवेक्षक गुलजार हुसैन, श्रमिक आपूर्तिकर्ता दिवाकर भंडारी और अब्दुल हमीद सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले की जांच के लिए एसीपी कुणाल अग्रवाल के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है, जो मुख्य रूप से ढांचागत सुरक्षा मानकों में चूक की जांच कर रहा है।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद इसे प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि त्रुटिपूर्ण संरचनात्मक डिजाइन का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि लोहे के बीम कंक्रीट का भार सहने में विफल रहे, जिसके कारण यह इमारत भरभरा कर गिर गई। इस घटना के बाद, सरकार ने पिछले प्रशासन के कार्यकाल में स्वीकृत सभी निर्माणाधीन व्यावसायिक परियोजनाओं के काम को 31 जुलाई तक के लिए रोक दिया है। अब एक बहुएजेंसी टीम इन परियोजनाओं के बिल्डिंग प्लान और सुरक्षा मानकों की गहन ऑडिट करेगी, जिसके बाद ही 1 अगस्त से निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। यह त्रासदी न केवल निर्माण कार्यों में सुरक्षा के प्रति बरती जाने वाली लापरवाही पर एक बड़ा सवालिया निशान है, बल्कि व्यवस्था में आमूलचूल सुधार की अनिवार्यता को भी रेखांकित करती है।

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