Ayodhya News: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक और दानदाता सामने आए हैं, जिन्होंने लाखों का दान दिया, लेकिन 6 लाख की एक मशीन की रसीद उन्हें कभी नहीं मिली. ये कोई सादरण दानदाता नहीं हैं. ये वो श्रीनिवास शास्त्री हैं, जो राम मंदिर पर सुप्रीम फैसला आते ही चांदी की एक ईंट लेकर अयोध्या पहुंच गए थे. तब DM की मौजूदगी में इन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारियों को वो ईंट सौंपी थी और DM ने तत्काल उनको रसीद भी दे दी थी, लेकिन बाद में सिस्टम ऐसा हुआ कि इन्हें बाकी के दान की रसीद के लिए गुहार लगानी पड़ी.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दिए इनके दान की लिस्ट बहुत लंबी है. शिलान्यास से ठीक पहले इन्होंने चार चांदी की ईंटें और दी थीं. इनके पास उनकी रसीद, तस्वीरें सब कुछ मौजूद है. बाद में चांदी का विशाल धनुषबाण, दो जोड़ी चरण पादुकाएं, त्रिशूल, थाल और रोटी बनाने की मशीन इन्होंने ये सब दान में दिया. बारबार मांगने के बाद इन्हें चांदी दान की रसीद तो दे दी गई, लेकिन लाखों की रोटी मशीन की अब तक कोई रसीद नहीं दी गई है. दान किए अब पांच साल हो गए.
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श्रीनिवास शास्त्री ने ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए
हैदराबाद के रहने वाले श्रीनिवास शास्त्री ने ट्रस्ट पर भेदभाव तक के गंभीर आरोप लगाए हैं. पेशे से साउंड इंजीनियर रहे श्रीनिवास के पिता लक्ष्मी सुंदरम शास्त्री कारसेवक थे. उन्होंने अपना जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित कर दिया था. उनके मृत्यु के बाद उनकी मनोकामना पूरी करने के लिए श्रीनिवास शास्त्री रामेश्वरम से पैदल यात्रा करके अयोध्या तक की दूरी तय की. यही नहीं सिर पर चांदी की चरणपादुकाएं लिए सभी पीठ के शंकराचार्यों के पास पहुंच कर पादुका पूजन कराया. उसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट को वो पादुकाएं समर्पित कीं.
अयोध्या में ही रहते हैं श्रीनिवास शास्त्री
आज उनका दर्द ये भी है कि उनके दिए इस दान को उचित स्थान नहीं दिया गया और कारसेवकपुरम तक सीमित कर दिया गया. श्रीनिवास शास्त्री तस्वीरें दिखाते हैं और अपनी तपस्या का प्रमाण देते हैं. इनका कहना है कि इतना दान देने और अपना जीवन अयोध्या की सेवा में लगा देने के बावजूद ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी ने उनसे ठीक से बात तक नहीं की. वो अभी चल रहे प्रकरण से बेहद आहत हैं. नौकरी छोड़कर श्रीनिवास शास्त्री अयोध्या के होकर रह गए. यहां अपने द्वारा स्थापित ट्रस्ट के माध्यम से लोगों की सेवा करते हैं. सैंकड़ों लोगों को रोज निशुल्क भोजन करवाते हैं.



