Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर में दान राशि में कथित गड़बड़ी के मामले पर कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सिर्फ इस्तीफा देना ही काफी नहीं है, बल्कि इसकी निष्पक्ष जांच होनी भी होनी चाहिए।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए यह भी कहा कि यह मामला करोड़ों राम भक्तों की आस्था और विश्वास से जुड़ा है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सबके सामने आना जरूरी है, ताकि लोगों के मन में किसी तरह का कोई संदेह न रहे।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने क्या कहा
मीडिया से बात करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम कहते है कि राम मंदिर से जुड़ा यह विवाद केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों की भावनाओं पर आघात पहुंचाना के समान है। जिनकी भावना राम मंदिर से जुड़ी है। यदि दान राशि में किसी प्रकार का घोटाला हुआ है तो यह एक घोर पाप है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने एक बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि इस कथित घोटाले में शामिल लोगों की मदद किसने की, धनराशि कहां गई और इसके पीछे कौनकौन लोग शामिल हैं, जैसे कई प्रश्न आज भी राम भक्तों के मन में उठ रहे हैं। इन सभी सवालों का जवाब तभी मिल सकता है जब जांच किसी ऐसी एजेंसी को सौंपी जाए, जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो।
अपनेअपने पदों से हट जाना चाहिए
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संबंध में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रस्ट के सभी सदस्यों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपनेअपने पदों से हट जाना चाहिए। यदि केवल कुछ लोगों को दोषी ठहराया जाता है और कुछ को क्लीन चिट दे दी जाती है, तो इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे। पूरे ट्रस्ट को जांच पूरी होने तक नैतिक आधार पर अलग हो जाना चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का संदेह न रहे।
मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के निर्देश
आपको बताते चले कि आचार्य प्रमोद कृष्णम ने से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने यह भी कहा कि देश के करोड़ों लोगों को विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रहते राम मंदिर से जुड़े किसी भी कथित घोटाले में दोषी व्यक्ति बच नहीं सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि जनता के भरोसे को बनाए रखने के लिए मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए जाएं।
दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए।
एक रिपोर्ट का मुताबिक, विपक्षी दलों के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णमका यह भी कहना है कि समाजवारी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का की आस्था से कोई संबंध नहीं रहा है। विपक्ष हमेशा राम मंदिर के विरोध में रहा है। जिस के बाद विपक्ष को एक राजनीतिक मुद्दा मिल गया है।
विपक्ष को नया मुद्दा न मिले, इसके लिए भी आवश्यक है कि ट्रस्ट के सभी सदस्य त्यागपत्र दें और जांच सीबीआई को सौंप दी जाए, ताकि पूरे मामले की पारदर्शी और विश्वसनीय जांच हो सके। इसलिए देश की जनता चाहती है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए।



