Rajasthan Crime News: राजस्थान के झालावाड़ जिले की भवानीमंडी कोर्ट ने पति की हत्या के मामले में एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजीव दत्तात्रेय ने मृतक की पत्नी और उसके प्रेमी को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस पूरे मामले में मृतक की 14 वर्षीय मासूम बेटी की गवाही आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में सबसे अहम कड़ी साबित हुई.
यह सनसनीखेज वारदात सुनेल थाना क्षेत्र के सोंगरिया गांव की है. अपर लोक अभियोजक हेमराज शर्मा ने बताया कि 17 सितंबर 2024 को मृतक शिवराज सिंह के भाई नरेंद्र सिंह ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. नरेंद्र सिंह ने बताया था कि सुबह करीब छह बजे उनके भाई की 14 वर्षीय बेटी अदिति भागती हुई आई और कहा कि पापा को कुछ हो गया है. जब नरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे तो शिवराज सिंह कमरे में चारपाई पर मृत अवस्था में पड़े थे.
शिवराज के सिर से खून बह रहा था और उनके दाहिने हाथ पर हीटर की स्प्रिंग लिपटी हुई थी. नरेंद्र सिंह ने तभी मृतक की पत्नी किरण कंवर और गांव के ही सुरेंद्र उर्फ सुंदर सिंह के खिलाफ हत्या की आशंका जताते हुए नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी.
5 साल के अवैध संबंध और करंट लगाने की साजिश
पुलिस जांच और अदालती कार्रवाई में यह साबित हुआ कि किरण कंवर और सुरेंद्र उर्फ सुंदर सिंह के बीच पिछले पांच सालों से प्रेम संबंध चल रहे थे. मृतक शिवराज सिंह कई बार इसका विरोध कर चुका था और रिश्तेदारों ने उन्हें समझाया भी था. प्रेम में बाधा बन रहे पति को रास्ते से हटाने के लिए दोनों ने एक खौफनाक साज़िश रची.
वारदात वाली रात आरोपियों ने पहले शिवराज सिंह के सिर पर हथौड़े से ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया. इसके बाद हत्या को एक हादसा दिखाने के लिए उन्होंने मृतक के दाहिने हाथ पर हीटर की जलती हुई स्प्रिंग लपेट दी, ताकि पुलिस और समाज को लगे कि शिवराज की मौत करंट लगने से हुई है.
बेटी के बयानों ने खोल दी मां के गुनाहों की पोल
कातिलों ने साजिश तो फुलप्रूफ रची थी, लेकिन वे कानून की नजरों से बच नहीं पाए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि चोटें करंट की नहीं बल्कि हथौड़े की थीं. अदालत में इस मामले को अंजाम तक पहुंचाने में मृतक की 14 वर्षीय बेटी अदिति के बयान सबसे बड़ा साक्ष्य बने. बेटी ने अदालत के सामने अपनी कातिल मां और उसके प्रेमी के खिलाफ निडर होकर गवाही दी. अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 23 गवाहों और बेटी के बयानों के आधार पर दोनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 और 3 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.



