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तेजी से परमाणु हथियार बढ़ा रहा चीन, 600 के पार हुई संख्या; रूस-अमेरिका के मुकाबले कहां पहुंचा?

चीन तेजी से अपने परमाणु हथियार भंडार बढ़ा रहा है, सिपरी रिपोर्ट के अनुसार संख्या 620 के पार हो गई है।

तेजी से परमाणु हथियार बढ़ा रहा चीन, 600 के पार हुई संख्या; रूस-अमेरिका के मुकाबले कहां पहुंचा?

चीन हमेशा से ही अपने परमाणु हथियार भंडार को लेकर सार्वजानिक नहीं हुआ है। ऐसा माना जाता रहा है कि चीन की परमाणु नीति उसकी आत्मरक्षा के इर्दगिर्द घुमती है। चीन लगातार ‘नो फर्स्ट यूज’ पॉलिसी यानी कि पहले इस्तेमाल न करने की नीति पर अडिग रहा है।

लेकिन यहां सोचने वाली बात यह है कि अगर वाकई ऐसा है तो वह अमेरिका और रूस की त्रिपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल क्यों नहीं होता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इन समय तेजी से अपनी परमाणु क्षमता को बढ़ा रहा है। एक आंकलन के मुताबिक साल 2023 से 2025 के बीच चीन हर साल लगभग 100 परमाणु हथियार अपने भंडार में जोड़ रहा है।

हालांकि पिछले साल यह बढ़ोतरी घट कर 20 ही रह गई। पश्चिमी मीडिया के अनुसार लगातार अपने परमाणु हथियार को मजबूत बनाने का मकसद ‘सेकेंड स्ट्राइक’ यानी की जवाबी हमले को बेहतर बनाना है।

चीन के पास कितने परमाणु हथियार भंडार?

चीन कभी अपने परमाणु हथियार भंडार को सर्वजनिक नहीं करता है। वावजूद इसके पश्चिमी विशेषज्ञों ने हाल के सालों में इसमें तेजी से बढ़ोतरी देखी।

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संगठन की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी तक चीन के पास 620 परमाणु हथियार मौजूद थे, यह संख्या पिछले साल 600 थी।

इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चीन ने साल 2023 से लेकर 2024 तक अपने भंडार में 90 वॉरहेड जोड़े थे जो 2024 से 2025 में बढ़कर 100 हो गए।

अमेरिकी रक्षा विभाग की एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसा माना जा रहा है कि साल 2030 तक चीन 1000 परमाणु हथियार बना सकता है। इसी के साथ साल 2022 एक रिपोर्ट कहती है कि साल 2035 तक यह संख्या 1500 तक भी पहुंच सकती है। हालांकि 2024 की रिपोर्ट में इस अनुमान का जिक्र नहीं है।

सिपरी के आंकड़ें यह भी बताते हैं कि अगर चीन 2030 तक 1000 वॉरहेड के करीब पहुंच भी जाता है फिर भी वह अमेरिका और रूस के परमाणु हथियार भंडार का एक चौथाई ही होगा।

क्या है चीन की ‘नो फर्स्ट यूज’ पॉलिसी?

चुनी शुरू से ही ‘नो फर्स्ट यूज’ पर अमल करता आया है। इसका मतलब है कि किसी भी कीमत पर पहला हमला नहीं किया जाएगा। चीन का कहना है कि उसके परमाणु हथियार केवल आत्मरक्षा के लिए हैं।

साथ ही वह दूसरे देशों से भी ‘नो फर्स्ट यूज’ पर अमल करने को कहता रहा है। चीन इन आरोपों को भी लगातार खारिज करता आया है जिसमे कहा गया है कि वह अपने परमाणु भंडार को तेजी से बढ़ा रहा है।

चीनी हथियारों का शक्ति प्रदर्शन

चीनी ने हाल के वर्षों में कई बार अपनी परमाणु क्षमता का खुलकर प्रदर्शन किया है। साल 2024 में एक बिना हथियार वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल प्रशांत महासागर में दागी गई। इसने मिसाइल ने 12000 किमी की दूरी तय की।

दूसरा मौका तब आया जब साल 2025 में जापान पर जीत के 80वीं वर्षगाठ पर आयोजित परेड में चीन ने पहली बार अपना ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ सामने लाया।

इस ट्रायड में हवा, जमीन और पानी से लॉन्च होने वाली न्यूक्लियर मिसाइलें शामिल थीं। चीनी मीडिया ने इस न्यूक्लियर ट्रायड को सबसे घातक हथियार बताया।

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