HealthIndia

National Doctors Day: मशीनें दे रही हैं सटीक डेटा, AI के दौर में बदल रहा डॉक्टरी इलाज

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , मशीन लर्निंग और डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने स्वास्थ्य सेवाओं की दुनिया को बदलना शुरू कर दिया है. आज अस्पतालों में मरीजों की रिपोर्ट पढ़ने से लेकर बीमारी का शुरुआती आकलन करने और सर्जरी की योजना बनाने तक, कई कामों में एआई की मदद ली जा रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भविष्य में डॉक्टरों की भूमिका कम हो जाएगी या उनकी जिम्मेदारियां नए स्वरूप में सामने आएंगी.

National Doctors Day: मशीनें दे रही हैं सटीक डेटा, AI के दौर में बदल रहा डॉक्टरी इलाज

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और नई तकनीक ने डॉक्टरों के काम को आसान जरूर बनाया है, लेकिन ये डॉक्टरों की जगह नहीं ले सकती. इसके बजाय, तकनीक डॉक्टरों को अधिक सटीक, तेज और प्रभावी इलाज देने में मददगार साबित हो रही है.

एक वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा क्षेत्र में डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. आज एआई आधारित सॉफ्टवेयर एक्सरे, सीटी स्कैन और एमआरआई रिपोर्ट में असामान्यताओं की पहचान करने में मदद कर रहे हैं. इससे बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाने की संभावना बढ़ी है. उन्होंने कहा, एआई एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन यह डॉक्टर का विकल्प नहीं है.

अब इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड, डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन और ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग सिस्टम की मदद से डॉक्टर मरीजों के साथ अधिक समय बिता पा रहे हैं. इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिल रहा है.

टेलीमेडिसिन भी लेकर आई एक बड़ा बदलाव

डॉक्टर नीरज कुमार का कहना है कि टेलीमेडिसिन भी स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है. अब मरीज वीडियो कॉल के जरिए डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है.

एक स्वास्थ्य तकनीक विशेषज्ञ ने कहा, “तकनीक ने डॉक्टरों की भूमिका को सीमित नहीं किया है, बल्कि उसे और अधिक प्रभावशाली बना दिया है. अब डॉक्टर केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे डेटा, डिजिटल टूल्स और प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स की मदद से बीमारी की रोकथाम और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.” हालांकि, तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं.

डेटा सेफ्टी भी एक बड़ी चिंता

मरीजों की गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और एआई के निर्णयों की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तकनीकी उपकरण का अंतिम निर्णय लेने का अधिकार डॉक्टर के पास ही रहना चाहिए. डॉक्टरों का कहना है कि चिकित्सा केवल विज्ञान नहीं, बल्कि एक मानवीय पेशा भी है. मरीज अक्सर बीमारी के दौरान भावनात्मक सहारे, भरोसे और संवाद की अपेक्षा करते हैं, जिसे कोई मशीन पूरी तरह से नहीं दे सकती.

एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, “मरीज केवल अपनी रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के पास नहीं आता, वह अपनी चिंताएं, डर और उम्मीद भी लेकर आता है. एआई आंकड़े दे सकता है, लेकिन सहानुभूति, भरोसा और मानवीय स्पर्श केवल एक डॉक्टर ही दे सकता है.” विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले वर्षों में डॉक्टरों की भूमिका और अधिक बहुआयामी होगी.

उन्हें चिकित्सा ज्ञान के साथसाथ डिजिटल तकनीकों और डेटा आधारित स्वास्थ्य प्रणालियों की समझ भी विकसित करनी होगी. मेडिकल शिक्षा में भी धीरेधीरे एआई और डिजिटल हेल्थ से जुड़े विषयों को शामिल किया जा रहा है, ताकि भविष्य के डॉक्टर नई तकनीकों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply