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अमरनाथ यात्रा : जम्मू में रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी प्रक्रिया शुरू, श्रीनगर के ट्रांजिट कैंपों में जुटे श्रद्धालु

नई दिल्ली : श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मूकश्मीर में सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। बुधवार को जम्मू में यात्रियों के लिए मौके पर ही पंजीकरण और आरएफआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई। शुक्रवार को जम्मूकश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

अमरनाथ यात्रा : जम्मू में रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी प्रक्रिया शुरू, श्रीनगर के ट्रांजिट कैंपों में जुटे श्रद्धालु

जम्मू में मौके पर ही रजिस्ट्रेशन कराने और आरएफआईडी कार्ड के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्री कतारों में खड़े नजर आए। अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह भी देखा गया। एक तीर्थयात्री ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मैं बहुत उत्साहित हूं। मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे पहले बैच में मौका मिलेगा। मैं काफी समय से कोशिश कर रहा था।” जम्मू में श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा को लेकर की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं पिछली बार भी यात्रा पर गया था। इस बार भी यात्रा के लिए जा रहा हूं। यह व्यवस्थाएं बहुत अच्छी लग रही हैं।”

तीसरे जत्थे में जाने वाले एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं तीसरी बार यात्रा के लिए जा रहा हूं। सारी सुविधाएं अच्छी हैं। हालांकि, रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी कार्ड के लिए थोड़ी परेशानी होती है। इसके बाद काफी सुकून मिल जाता है और विश्वास हो जाता है कि बाबा के दर्शन कर पाएंगे।”

वहीं, अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना होने से पहले श्रीनगर में यात्री ट्रांजिट कैंप में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं। मैं वहां पहली बार जा रहा हूं।” एक महिला तीर्थयात्री ने कहा, “मैं बाबा भोलेनाथ में आस्था लेकर आई हूं। उन्होंने हमें बुलाया है और वही दर्शन कराएंगे।”

महिला ने बताया कि वह भी पहली बार अमरनाथ यात्रा के लिए आई हैं। उन्होंने प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हम बुधवार रात को ट्रांजिट कैंप पहुंचे थे। यहां व्यवस्थाएं अच्छी हैं। किसी भी चीज की कमी नहीं है।”

बता दें कि अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू होगी और 28 अगस्त को खत्म होगी। पहलगाम रास्ते से मंदिर तक पहुंचने में लगभग चार दिन लगते हैं। बालटाल से जाने वाला रास्ता छोटा है, जहां दर्शन के बाद उसी दिन वापस लौटा जा सकता है।

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