
Diabetes Management Tips: भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और इसके साथ ही सोशल मीडिया पर खान-पान को लेकर कई तरह के भ्रम भी फैल रहे हैं। डायबिटीज फ्रेंडली डाइट को लेकर अक्सर मरीजों के मन में यह सवाल उठता है कि वो दोपहर या रात के भोजन में क्या खाएं? रोटी खाएं या चावल, किसे खाने से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ता है। डाइटिशियन श्वेता जे पंचाल के अनुसार, डेली और खानपान में किए गए साधारण बदलाव करके लंबे समय तक सकारात्मक असर डाल सकते हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि यदि परिवार में किसी को डायबिटीज है, तो लाइफस्टाइल और डाइट में किए गए कुछ आसान बदलाव सेहत पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। घर में किसी सदस्य को डायबिटीज है तो रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने या बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं।
खाने के समय में बदलाव से लेकर खाद्य पदार्थों के कॉम्बिनेशन पर ध्यान देने तक एक्सपर्ट ने शुगर कंट्रोल करने के लाइफस्टाइल और डाइट से जुड़े बदलाव बताए है,जिन्हें आसानी से अपनाया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया फलों पर दालचीनी छिड़कें, यह शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती है। रात का खाना 7 बजे तक खत्म कर लें, देर से खाना खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है। खाने के बाद 10 मिनट टहलें, भले ही घर पर ही क्यों न हो। चावल और रोटी को एक साथ न खाएं, इससे शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। हर भोजन की शुरुआत फाइबर से करें, यह शुगर के अवशोषण को धीमा करता है। आइए एक्सपर्ट की इस सलाह की तसदीक डॉक्टर से करते हैं। क्या सचमुच चावल और रोटी का सेवन सेहत के लिए खतरा है?
चावल और रोटी साथ खाने से ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ता है?
कंसल्टेंट डाइटिशियन और डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा ने बताया कि यदि ब्लड शुगर को एक बाल्टी माना जाए, तो एक ही भोजन में चावल और रोटी दोनों खाना ऐसा है जैसे एक साथ दो नलों से पानी बाल्टी में डाला जा रहा हो। दोनों ही कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं और साथ खाने पर ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि एक समय में केवल एक कार्ब स्रोत चुनें और प्लेट में अधिक मात्रा में सब्जियां या दाल शामिल करें। इससे ब्लड ग्लूकोज को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
क्या छोटे बदलाव बड़े डाइट प्लान जितने प्रभावी हो सकते हैं?
कनिका मल्होत्रा के अनुसार, भोजन के बाद टहलना और दालचीनी का सीमित उपयोग जैसी छोटी आदतों को असरदार बताया गया है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि इन आदतों की मदद से भोजन के बाद ब्लड शुगर में आने वाली तेजी को 15 से 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। हालांकि, यदि व्यक्ति की मूल खानपान की आदतें असंतुलित बनी रहती हैं तो इन छोटे बदलावों का असर एक सीमा तक ही रहता है। फिर भी नियमित रूप से अपनाए गए छोटे सुधार लंबे समय में ब्लड शुगर कंट्रोल में उतने ही प्रभावी साबित हो सकते हैं जितने बड़े डाइटरी बदलाव।
डायबिटीज में भोजन का समय कितना महत्वपूर्ण है?
कनिका मल्होत्रा बताती हैं कि जल्दी डिनर करने का फायदा इसलिए होता है क्योंकि इंसुलिन की कार्यक्षमता और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म हमारे शरीर की जैविक घड़ी (सर्कैडियन रिद्म) से जुड़े होते हैं। देर रात भोजन करने पर रात के समय ब्लड शुगर अधिक बढ़ सकता है और अगली सुबह फास्टिंग शुगर भी ज्यादा रह सकता है। उनके अनुसार, कई लोगों में रात 9 बजे की बजाय शाम 7 बजे डिनर करने से फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज 10 से 15 mg/dL तक कम हो सकता है।
हर व्यक्ति के लिए भोजन का समय अलग हो सकता है
विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म और दिनचर्या अलग होती है। उदाहरण के लिए, नाइट शिफ्ट में काम करने वाले या देर से उठने वाले लोगों को अपने सोने-जागने के समय के अनुसार भोजन का समय निर्धारित करना पड़ सकता है। केवल घड़ी का समय ही नहीं, बल्कि भोजन का शरीर की डेली रूटीन के साथ तालमेल भी महत्वपूर्ण होता है। कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM) से भी यह देखा गया है कि भोजन का समय बदलने से ब्लड शुगर पर असर पड़ता है, भले ही भोजन एक जैसा ही क्यों न हो।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी और सुझाव केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। इसे किसी भी तरह से योग्य डॉक्टर की चिकित्सा सलाह, निदान या डायबिटीज के पेशेवर उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हर व्यक्ति के शरीर का मेटाबॉलिज्म और शुगर का स्तर अलग होता है। अपनी डाइट, दवाओं या जीवनशैली में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।



