
डायबिटीज के मरीजों के लिए न्यूरोपैथी (नसों की कमजोरी) एक बेहद जटिल समस्या है, जिसके कारण अक्सर पैरों में तेज झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है। इस स्थिति को ठीक करने के लिए लोग कई तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं, लेकिन हालिया वैज्ञानिक शोध कुछ अलग और दिलचस्प संकेत दे रहे हैं। रिसर्च के मुताबिक, लाल मिर्च में पाया जाने वाला एक खास सक्रिय तत्व ‘कैप्सैसिन’ (Capsaicin) नसों के दर्द को शांत करने में मददगार साबित हो सकता है।
यह दावा जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (JAPI) में प्रकाशित एक नई समीक्षा में किया गया है। इस समीक्षा में 22 क्लिनिकल स्टडीज का विश्लेषण किया गया, जिनमें 1,800 से अधिक मरीज शामिल थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि स्किन पर लगाने वाली कैप्साइसिन (Capsaicin) दवा नसों से जुड़े दर्द में राहत दे सकती है, खासकर डायबिटिक पेरिफैरल न्यूरोपैथी (DPN) और पोस्ट हर्पेटिक न्यूराल्जिया (PHN) में।
अध्ययन के अनुसार 0.075% कैप्साइसिन क्रीम सबसे अधिक प्रभावी रही। इसका मतलब है कि 100 ग्राम क्रीम, जेल या लोशन में 0.075 ग्राम मिर्च से प्राप्त सक्रिय तत्व मौजूद होता है। रिसर्च के मुताबिक स्किन पर लगाई जाने वाली कैप्साइसिन पेनकिलर के बराबर ही असरदार साबित होती है। इस क्रीम का इस्तेमाल करने से किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता जैसा कि अक्सर पेनकिलर दवाओं के सेवन से होता है।
कैप्साइसिन कैसे करता है काम?
डायबिटीज स्पेशियलिटी सेंटर के चेयरमैन डॉ. वी. मोहन जिनके नेतृत्व में इस रिसर्च की समीक्षा की गई है, ने बताया कैप्साइसिन कोई नया तत्व नहीं है। मिर्च को तीखा बनाने वाला वही सक्रिय घटक है जो सालों से दर्द को कम करने वाली बाम और मरहम में इस्तेमाल होता रहा है। डॉ. वी. मोहन के अनुसार, इस नई समीक्षा की खास बात यह है कि अब नसों के दर्द में इसके प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण काफी मजबूत हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कैप्साइसिन केवल स्किन में जलन पैदा करके राहत देने वाला साधारण घटक नहीं है, बल्कि यह दर्द पहुंचाने वाली नसों पर सीधे काम करने वाली उपचार पद्धति है। समीक्षा में यह भी संकेत मिला कि 0.075% कैप्साइसिन फॉर्मूलेशन बाजार में उपलब्ध कम शक्ति वाले उत्पादों की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकता है।
क्या यह दूसरे प्रकार के नसों के दर्द में भी मदद कर सकता है?
रिसर्च की समीक्षा में शामिल डॉ. मंगेश तिवास्कर के अनुसार फिलहाल सबसे मजबूत प्रमाण डायबिटिक पेरिफैरल न्यूरोपैथी और पोस्ट हर्पेटिक न्यूराल्जिया के लिए उपलब्ध हैं। हालांकि नसों का दर्द कई अन्य कारणों से भी हो सकता है, जैसे विटामिन बी की कमी, थायरॉयड विकार, अल्कोहल से नसों को नुकसान, कीमोथेरेपी से होने वाली न्यूरोपैथी, नस दबने की समस्या, अन्य मेटाबॉलिक और न्यूरोलॉजिकल रोग शामिल हैं। इन स्थितियों में मरीजों को जलन, झुनझुनी, सुन्नपन, बिजली के झटके जैसा एहसास और अत्यधिक संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। क्योंकि कैप्साइसिन दर्द महसूस करने वाली नसों के सिरों पर काम करती है, इसलिए यह दूसरे नसों के दर्द में भी उपयोगी हो सकती है।
डायबिटीज न्योरोपैथी का इलाज लाल मिर्च खाकर या लगाकर हो सकता है?
आपको बता दें कि रसोई की लाल मिर्च सीधे न लगाएं। रिसर्च में जिस राहत की बात की गई है, वह लाल मिर्च को सीधे पैरों पर लगाने या अत्यधिक खाने से नहीं मिलती है। मिर्च को सीधे त्वचा या डायबिटीज के कारण हुए पैरों के घावों (Diabetic Foot Ulcer) पर लगाने से स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। डॉक्टर के अनुसार, वैज्ञानिक लैबोरेट्री में मिर्च से ‘कैप्सेसिन’ (Capsaicin) तत्व को निकालकर एक निश्चित और सुरक्षित मात्रा (0.075%) में मेडिकल क्रीम, जेल या पैच तैयार करते हैं। इसका इस्तेमाल केवल डॉक्टर की देखरेख और उनकी सलाह पर ही किया जाना जाता है।
कैप्सैसिन क्रीम लगाते समय सावधानियां हैं जरूरी
- एक्सपर्ट ने बताया अगर आप इस क्रीम या जेल को केवल प्रभावित सुन्न-झुनझुनी वाले हिस्से की साफ स्किन पर लगाएं। इसे किसी भी खुले घाव, कटी हुई स्किन या छालों पर भूलकर भी न लगाएं।
- आंखों और चेहरे का बचाव करें। क्रीम लगाने के तुरंत बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धो लें। अनजाने में भी क्रीम लगे हाथों से आंख, नाक या चेहरे को न छुएं।
- पहली कुछ बार क्रीम लगाने पर हल्की जलन या गर्माहट महसूस होना नॉर्मल है, लेकिन यदि त्वचा लाल हो जाए या दाने निकल आएं, तो तुरंत इसे धो लें और डॉक्टर से संपर्क करें।
डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई जानकारी JAPI जर्नल के शोध और मधुमेह विशेषज्ञों (डॉ. वी. मोहन और डॉ. मंगेश तिवास्कर) के चिकित्सा इनपुट्स पर आधारित है। डायबिटीज न्यूरोपैथी एक गंभीर स्थिति है, पैरों में झुनझुनी, घाव या सुन्नपन होने पर किसी भी तरह की क्रीम, जेल या घरेलू उपाय अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें।


