भारतीय शेयर बाजार के लिए जुलाई का महीना एक बार फिर उम्मीदें लेकर आया है. पिछले कई वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई अक्सर दलाल स्ट्रीट के लिए अच्छा साबित हुआ है. इस बार भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती, विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और पश्चिम एशिया में कम होता तनाव बाजार को सहारा दे सकता है. ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में निफ्टी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है.

10 में से 8 बार जुलाई में चढ़ा बाजार
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में निफ्टी और निफ्टी 500 इंडेक्स जुलाई महीने में 8 बार बढ़त के साथ बंद हुए हैं. इस दौरान निफ्टी ने औसतन 3.1 फीसदी और निफ्टी 500 ने 3.2 फीसदी का रिटर्न दिया. वहीं ब्लूमबर्ग के आंकड़े बताते हैं कि निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स भी पिछले 10 में से 8 जुलाई महीनों में सकारात्मक रहे हैं.
निफ्टी में 500700 अंकों की तेजी की उम्मीद
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के टेक्निकल और डेरिवेटिव रिसर्च प्रमुख चंदन तापड़िया का कहना है कि मई और जून की अपेक्षाकृत सुस्त चाल के बाद जुलाई में बाजार का रुख बेहतर रह सकता है. उनका अनुमान है कि यदि पिछले वर्षों का ट्रेंड कायम रहता है, तो निफ्टी 50 मौजूदा स्तर से 500 से 700 अंक यानी करीब 2 से 3 फीसदी तक की बढ़त दर्ज कर सकता है.
मंगलवार को निफ्टी 23,865.75 के स्तर पर बंद हुआ. जून में इसमें 1.35 फीसदी की तेजी रही. वहीं निफ्टी मिडकैप 100 में 0.1 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 4.3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.
ये फैक्टर देंगे बाजार को सपोर्ट
IIFL Capital Services के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्रीराम वेलायुधन का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट, पश्चिम एशिया में तनाव कम होना और बेहतर मानसून बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं. उनके मुताबिक, हाल के हफ्तों में निफ्टी 23,000 से 24,300 के दायरे में कारोबार कर रहा है और जुलाई में यह एक बार फिर इस रेंज के ऊपरी स्तर को छू सकता है.
ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी काफी नीचे आ चुकी हैं. महीने की शुरुआत में करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से गिरकर यह करीब 74 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. लगातार गिरती तेल कीमतों से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलती है और कंपनियों की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ता है.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर रहेगी नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर बड़ी कंपनियों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. चंदन तापड़िया के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और आईटी सेक्टर की कमजोरी के कारण लार्जकैप शेयरों पर दबाव बना हुआ है. इसके विपरीत, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है.
उनका कहना है कि रुपये और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है. अगर बाजार में हल्की गिरावट भी आती है, तो निवेशक इसे खरीदारी के मौके के रूप में देख सकते हैं. ऐसे में निफ्टी के 24,500 से 24,750 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बनी हुई है, जबकि 23,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है.
हालांकि, विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखते हुए ही निवेश संबंधी फैसले लें.



