भारत के जेलों की सिक्युरिटी बेहद टाइट होती है. कैदियों पर चौबीस घंटे नजर रखी जाती है. लेकिन फ़िनलैंड में एक ऐसी जेल है, जहां कैदी सजा काटते हैं या मजा लेते हैं, समझ नहीं आता. इस जेल में ना तो कोई गार्ड है और ना ही अपराधियों को जेल में बंद रखा जाता है.

दुनिया भर में जेलें सजा देने और अपराधियों को सुधारने का माध्यम मानी जाती हैं. लेकिन फिनलैंड ने जेल व्यवस्था को पूरी तरह नया रूप दे दिया है. यहां एक जेल ऐसी है जिसे देखकर लगता है कि कैदी सजा काटने नहीं बल्कि छुट्टियां मनाने आए हैं. फिनलैंड की कई जेलें ‘ओपन प्रिजन’ मॉडल पर चलती हैं. इन जेलों में ना तो ऊंची दीवारें हैं, ना बारबेड वायर और ना ही सख्त गार्ड. यहां कैदियों को हथकड़ियां नहीं पहनाई जातीं. उन्हें दिन के समय बाहर घूमने, काम करने और यहां तक कि कार चलाने की छूट होती है. सिर्फ रात में उन्हें जेल लौटना होता है.
कई कैदी लोकल टाउन में नौकरी करते हैं, दुकानों पर काम करते हैं या पढ़ाई जारी रखते हैं. वे परिवार से मिल सकते हैं और सामान्य जीवन जीते हैं. जेल प्रशासन कैदियों पर पूरा भरोसा करता है. अगर कोई नियम तोड़ता है तो उसे वापस क्लोज्ड जेल में भेज दिया जाता है.
क्यों अपनाया यह मॉडल?
फिनलैंड का मानना है कि कैदियों को समाज से अलग करने की बजाय उन्हें समाज में वापस लाना चाहिए. सख्त जेलें अपराधी को और ज्यादा क्रूर बना सकती हैं. इसलिए यहां पुनर्वास (rehabilitation) पर जोर दिया जाता है. इस सिस्टम का नतीजा भी शानदार है. फिनलैंड में जेल से रिहा होने के बाद दोबारा अपराध करने की दर दुनिया में सबसे कम है– महज 20-30% जबकि कई देशों में यह 50-70% तक पहुंच जाती है.
एक दिन कैदी का
सुबह कैदी उठते हैं, नाश्ता करते हैं और फिर काम पर निकल जाते हैं. कुछ फैक्ट्री में काम करते हैं, कुछ ऑफिस में. शाम को शॉपिंग, जिम या परिवार के साथ समय बिताने के बाद रात को जेल लौट आते हैं. कुछ कैदियों को सप्ताहांत पर घर जाने की भी अनुमति मिलती है. भारत में जेलें भारी भीड़ और कड़ी सुरक्षा वाली होती हैं. कैदियों को 24 घंटे नजर में रखा जाता है. ओपन जेल भारत में भी हैं लेकिन फिनलैंड जितनी आजादी नहीं मिलती. फिनलैंड का मॉडल दिखाता है कि विश्वास और सुधार से अपराध कम किया जा सकता है.


