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कार में AC चलाकर सोने से चली जाती है जान, कौन है साइलेंट किलर?

खड़ी गाड़ी में AC चलाकर सोने से क्या मौत होने का ख़तरा हो जाता है? पता क्यों नहीं लगता, कोई छटपटाता क्यों नहीं है? ऐसा कई जगह हो चुका है. इस बार गाजियाबाद में हो गया. 30 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अखिलेश पुरोहित अपनी पत्नी को लेने दहरादून के लिए निकले थे लेकिन बाद में कार में उनका शव मिला.

कार में AC चलाकर सोने से चली जाती है जान, कौन है साइलेंट किलर?

तो पुलिस को आशंका है कि वो रास्ते में कार रोककर AC चालू करके सो गए होंगे. शायद उन्होंने शराब पी हुई थी और गाड़ी की खिड़कियां बंद थीं तो उनकी गाड़ी में मौत हो गई. तो ये सबको समझने की ज़रूरत है कि ऐसा कैसे हो जाता है? क्या शराब पी हुई थी, इसलिए पता नहीं चला या कोई और वजह होती है? क्योंकि इससे पहले भी कई बार ऐसी ख़बरें आ चुकी हैं लेकिन उनमें तो लोगों ने शराब भी नहीं पी हुई थी.

तो खड़ी गाड़ी में AC चलाकर सोने में ऐसा क्या हो जाता है? तो होता ये है कि खड़ी गाड़ी में भी AC चलाओ तो इंजन तो चला कर ही रखना पड़ता है. इसलिए पेट्रोल या डीज़ल फुंकता रहता है और गाड़ी के एग्ज़ॉस्ट पाइप से धुआं निकलता रहता है. इस धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड नाम की एक बेहद ख़तरनाक गैस होती है. इस गैस में कोई रंग नहीं होता, कोई बदबू नहीं आती, कोई गंध ही नहीं होती. यानी दिखती भी नहीं है और इसको सूंघ भी नहीं सकते. अब आप कहोगे कि ये तो गाड़ी के बाहर निकलती है ना टेल पाइप से और लोग तो गाड़ी के अंदर होते हैं और खिड़कियां भी बंद रखते हैं, तो वो गाड़ी के अंदकर कैसे मर जाते हैं? AC के ब्लोअर से कोई गैस गाड़ी के अंदर नहीं जाती.

कैसे कार्बन मोनोऑक्साइड लेता है जान

AC का काम सिर्फ हवा को ठंडा करके अंदर फेंकना है और इसमें कोई ईंधन जलता नहीं, इसलिए कोई गैस पैदा नहीं होती. लेकिन एग्ज़ॉस्ट पाइप और उसके पूरे सिस्टम में छोटीमोटी लीकेज अक़्सर होती ही है. ज़ंग लग जाती है, या छेद होते हैं तो CO गैस यानी कार्बन मोनोऑक्साइड पहले ही बाहर निकलने लगती है. और गाड़ी के नीचे जमा हो जाती है क्योंकि गाड़ी खड़ी हुई होती है. और AC का ब्लोअर या हीटर फैन इस गैस को अंदर खींच लेता है. गाड़ी के सामने विंडशील्ड के नीचे या फ्रंट में हवा लेने का इनटेक होता है. जब फैन चलता है, तो गाड़ी के नीचे से आसपास की हवा को खींचकर अंदर फेंकता है. और गाड़ी के नीचे जमा हुई होती है CO गैस. खासकर AC में एक रिसर्कुलेट मोड होता है जिसमें वो अंदर की हवा को ही बारबार घुमाता रहता है, ताकि बाहर की नई हवा कम आए, लेकिन अगर CO एक बार अंदर घुस गई तो वो जमा होती जाती है गाड़ी के अंदर. गाड़ी के फर्श के छोटे छेदों से भी गैस अंदर आ जाती है, ज़ंग लगे हिस्सों से भी आ जाती है, दरवाज़ों की सील से आ जाती है, बॉडी में कई गैप होते हैं वहां से अंदर आ जाती है.

सोते आदमी के शरीर में क्या होता है?
आख़िर है तो वो गैस ही, कहीं से भी रास्ता बना कर घुस जाती है क्योंकि वैसे ही अंदर AC चल रहा होता है तो हवा को खींच लेता है. ये गैस सोते आदमी की सांस के साथ फेफड़ों में जाती है और वहां से ख़ून में पहुंच जाती है. ख़ून में होता है हीमोग्लोबिन, नाम सुना होगा आपने. हीमोग्लोबिन का काम होता है शरीर के हर अंग तक ऑक्सिजन पहुंचाना. लेकिन कार्बन मोनोऑक्साइड ऑक्सिजन मज़बूती से हीमोग्लोबिन से चिपक जाती है. तो हीमोग्लोबिन ऑक्सिजन नहीं ले जा पाता. ख़ून के ज़रिये ही ऑक्सिजन पहुंचता है अंगों तक. लेकिन हीमोग्लोबिन से चिपक जाती है CO, तो दिमाग़ तक ऑक्सिजन पहुंचना कम होता जाता है, दिल तक ऑक्सिजन जाना कम होता जाता है, दूसरे ज़रूरी अंगों तक ऑक्सिजन पहुंचना कम होता जाता है. लेकिन सोते हुए आदमी को पता क्यों नहीं चलता?

नींद में छाती ही खुमारी और चली जाती है जान
क्योंकि अगर ऑक्सिजन की कमी होने लगे तो सांस तेज़ होनी चाहिए, घबराहट होनी चाहिए, नींद खुल जानी चाहिए, ऐसा क्यों नहीं होता? वो बाहर निकलने की कोशिश क्यों नहीं करता? वो इसलिए क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड गैस जब फेफड़ों से ख़ून में जाती है खून में घुली हुई ऑक्सिजन एकदम से नहीं गिर जाती. धीरेधीरे एक ख़ुमारी सी छाने लगती है. कोई जाग रहा हो उसको भी नींद ही आने लगती है, और इन मामलों में तो लोग सो रहे होते हैं. तो वो नींद उल्टा और गहरी हो जाती है. ऊपर से शराब पी रखी हो तब तो ख़ुमारी बहुत ज़्यादा गहरी हो जाती है. शराब ना भी पी रखी हो तब भी नींद में पता नहीं चलता कि ऑक्सिजन कम हो रही है. सोते हुए लोगों को पता चलना तो दूर, अक्सर शरीर में कोई चेतावनी का संकेत मिलने से पहले ही गैस का असर इतना बढ़ चुका होता है कि वो बेहोश ही हो जाते हैं. धीरेधीरे दिमाग़ को ऑक्सिजन नहीं मिलने से व्यक्ति और गहरी नींद में चला जाता है, फिर बेहोशी आ जाती है. और उसी बेहोशी में दिल काम करना बंद कर देता है, दिमाग़ काम करना बंद कर देता है.

खड़ी गाड़ी में AC चलाकर सीधा मौत को दावत देना
यानी बिना किसी छटपटाहट के, बिना किसी घबराहट के, बिना तेज़ सांस फूलने के, व्यक्ति की ऐसे मौत हो जाती है जैसे कोई गहरी नींद में सोया हो. ये सब कुछ मिनटों में ही हो सकता है. घंटों भी लग सकते हैं. सब इस बात पर निर्भर करता है कि गैस कितनी मात्रा में अंदर घुस रही है. इसलिए कभी भी खड़ी गाड़ी में इंजन चलाकर AC ऑन करके सोना बेहद खतरनाक है, भले ही खिड़कियां बंद हों या गाड़ी बाहर खड़ी हो. बल्कि खिड़किया खुली हों तो उल्टा बाहर से ऑक्सिजन अंदर आने का चांस ज़्यादा रहता है. नहीं तो ये ख़तरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड गैस चुपके से ऑक्सिजन की जगह ले लेती है, शरीर में कोई अलार्म नहीं बजता, नींद बढ़ ही नहीं जाती, वो मौत की नींद बन जाती है. इसलिए खड़ी गाड़ी में AC चलाकर सीधा मौत को दावत देना बन सकता है. सौ बात की एक बात.

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