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भारत को लेकर बांग्लादेश ने दिया बड़ा संकेत, तीस्ता प्रोजेक्ट पर कहा- ‘कोई नाराज़ हुआ तो भी…’

भारत को लेकर बांग्लादेश ने दिया बड़ा संकेत, तीस्ता प्रोजेक्ट पर कहा- ‘कोई नाराज़ हुआ तो भी…’

बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने भारत के साथ रिश्तों और तीस्ता नदी परियोजना को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ भरोसे, बराबरी और आपसी सम्मान के आधार पर संबंध चाहता है. साथ ही साफ किया कि तीस्ता मास्टर प्लान जैसे घरेलू प्रोजेक्ट्स पर फैसला लेने का पूरा अधिकार बांग्लादेश का है और वह अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेगा.

तीस्ता प्रोजेक्ट पर बांग्लादेश का रुख
तीस्ता मास्टर प्लान को लेकर रहमान ने कहा कि यह पूरी तरह बांग्लादेश का आंतरिक मामला है. उनका कहना था कि देश अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से इस परियोजना को आगे बढ़ाएगा और इसमें किसी दूसरे देश को परेशान होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस परियोजना के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और इसका मकसद सिर्फ बांग्लादेश के लोगों का विकास और भलाई है.

‘अगर कोई नाराज होगा तो आम भेज देंगे’
शफीकुर रहमान ने बातचीत के दौरान हल्के अंदाज में कहा कि तीस्ता परियोजना से किसी को नाराज होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हम अपने देश के हित में यह योजना लागू करेंगे. हमारे दोस्त इससे खुश होंगे, दुखी होने की कोई वजह नहीं है. अगर कोई नाराज होता है तो हम उन्हें राजशाही के मशहूर आम भेजकर खुश करने की कोशिश करेंगे.’

भारत क्यों जता रहा है चिंता?
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से गुजरते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है. इस नदी के पानी के बंटवारे और प्रबंधन को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से बातचीत चलती रही है. भारत की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब स्थित है. यह रणनीतिक इलाका भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है और इसे ‘चिकन नेक’ के नाम से भी जाना जाता है.

शेख हसीना से लेकर अब तक क्या बदला?
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार तीस्ता परियोजना पर भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छुक थी. हालांकि, अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद उनकी सरकार गिर गई. इसके बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार और अब तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पूर्ण बहुमत की सरकार ने इस परियोजना में चीन के साथ सहयोग की दिशा में ज्यादा रुचि दिखाई है. इसी वजह से यह मुद्दा भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है.

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