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फिरोजपुर में नहर टूटने से 400 एकड़ धान की फसल जलमग्न, किसानों की बढ़ी चिंता

फिरोजपुर.

फिरोजपुर में नहर टूटने से 400 एकड़ धान की फसल जलमग्न, किसानों की बढ़ी चिंता

फिरोजपुर जिले के ममदोट क्षेत्र में गुरुवार को लक्ष्मण नहर में कटाव आने से सैकड़ों किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। गांव राहू के हिठाड़ के निकट नहर टूटने के बाद तेज बहाव का पानी आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे करीब 400 एकड़ में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई।

अचानक खेतों में पानी भरने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। घटना के बाद प्रभावित किसानों और ग्रामीणों में गहरा रोष देखने को मिला। ग्रामीणों के अनुसार, नहर में अचानक अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण पानी का दबाव बढ़ गया और नहर में कटाव आ गया। इसके बाद तेज बहाव का पानी सीधे खेतों में पहुंच गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में खेत पानी से भर गए और धान की फसल डूब गई। किसानों का कहना है कि कई खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

किसानों ने सिंचाई विभाग पर लगाए आरोप
प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया कि घटना की जानकारी देने के बावजूद काफी देर तक सिंचाई विभाग और प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। किसानों ने यह भी कहा कि कटाव वाले स्थान पर तत्काल मरम्मत शुरू नहीं होने से पानी लगातार खेतों में फैलता रहा। ग्रामीणों का कहना है कि धान के मौसम में लक्ष्मण नहर में पहले भी कई बार इसी तरह कटाव की घटनाएं हो चुकी हैं। उनका दावा है कि हर बार किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। किसानों का कहना है कि यदि नहर की समयसमय पर मजबूती से मरम्मत और निगरानी की जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

राहत कार्य शुरू करने की रखी मांग
किसानों ने यह भी मांग उठाई कि जब तक नहर में पानी की आपूर्ति बंद नहीं होगी, तब तक कटाव को पूरी तरह भरना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों से कई बार पानी रोकने और राहत कार्य शुरू करने की मांग की गई, लेकिन तत्काल कार्रवाई नहीं हो सकी। प्रभावित किसानों ने सरकार और सिंचाई विभाग से मांग की है कि नहरों में पानी छोड़ने से पहले उनकी क्षमता और स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाए। साथ ही कटाव वाले हिस्सों की समय रहते मरम्मत कराई जाए, ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह के नुकसान का सामना न करना पड़े। किसानों ने प्रभावित फसलों का जल्द सर्वे कराने, नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजा देने की भी मांग की है।

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