
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में क्राइम ब्रांच ने आईपीएस किरन यादव के नेतृत्व में इंटरनेशनल साइबर-फ्रॉड गैंग का पर्दाफाश किया है.
IPS Kiran Yadav: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक हैरान कर देने मामला सामने आया है. जहां क्राइम ब्रांच ने एक इंटरनेशनल साइबर-फ्रॉड गैंग का पर्दाफाश किया है. गोमती नगर के समिट बिल्डिंग से चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने 119 कर्मचारियों को हिरासत में लिया, जिनमें 92 पुरुष और 27 महिलाएं शामिल थीं.
जांच से पता चला है कि इस गैंग के तार कई देशों से जुड़े हैं. यह ऑपरेशन बुधवार देर रात क्राइम ब्रांच और कई स्थानीय पुलिस स्टेशनों की संयुक्त टीम ने एडीसीपी क्राइम किरन यादव की अगुवाई में चलाया.
कौन हैं किरन यादव?
इस ऑपरेशन के बाद आईपीएस अधिकारी किरन यादव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई हैं और लोग उसके बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं तो चलिए हम आपकी जिज्ञासा को शांत करते हैं. आईपीएस किरन यादव 2021 बैच की अधिकारी हैं. उनका जन्म 3 मई 1987 को हुआ था. उन्होंने B.Com, ई-कॉमर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) में पढ़ाई की है. मूल रूप से यूपी के सुल्तानपुर की रहने वाली किरन शत्रुघ्न सिंह यादव की बेटी हैं. उन्होंने 2020 की UPSC परीक्षा में देशभर में 392वीं रैंक हासिल की थी. उनके पिता चंडीगढ़ में इंजीनियर हैं और उनके भाई सूरज यादव एक कैनेडियन कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम करते हैं. इस भूमिका से पहले आईपीएस किरन यादव लखनऊ में एसीपी के पद पर तैनात थीं.
अमेरिकी नागरिकों को बनाता था निशाना
समिट बिल्डिंग से चल रहा यह कॉल सेंटर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता था. इस फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से यह ग्रुप विदेशी नागरिकों को टेक्निकल सपोर्ट, बैंकिंग और दूसरी सेवाएं देने के नाम पर धोखा देकर उनसे करोड़ों रुपये ठगता था. पुलिस ने मौके से लगभग 119 कर्मचारियों को हिरासत में लिया और कंप्यूटर, लैपटॉप व मोबाइल फोन समेत कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं. पुलिस अब गैंग के सरगनाओं, विदेशी संपर्कों, बैंक अकाउंट्स, डिजिटल वॉलेट और हवाला चैनलों के माध्यम से किए गए ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच कर रही है.



