नई दिल्ली : पंजाब के मशहूर अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर बिना किसी कट के रिलीज हुई इस फिल्म को केंद्र सरकार के निर्देश के बाद अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह सख्त कदम सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए उठाया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में पंजाब के राजनीतिक दलों और सिखों की सर्वोच्च संस्था एसजीपीसी ने फिल्म की रिलीज का समर्थन किया था और खुद दिलजीत दोसांझ ने जनता से अपील की थी कि वे इस फिल्म को जहां और जैसे भी संभव हो, जरूर देखें।

1990 के दशक के पंजाब और एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा पर आधारित है कहानी
फिल्म ‘सतलुज’ की कहानी 1990 के दशक के उस बेहद संवेदनशील और अशांत दौर पर आधारित है, जब पंजाब आतंकवाद की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। यह फिल्म मुख्य रूप से मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष को पर्दे पर दिखाती है। विषय की संवेदनशीलता के कारण ही यह फिल्म पिछले तीन साल से अधिक समय से सेंसर बोर्ड के पास अटकी हुई थी। शुक्रवार को मेकर्स ने इसे बिना किसी कांटछांट के ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर स्ट्रीम कर दिया था, लेकिन रविवार शाम होतेहोते इसे वहां से हटा लिया गया।
सेंसर बोर्ड ने सुझाए थे 127 कट, नाम बदलकर चुपचाप रिलीज करने का आरोप
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि फिल्म के निर्माताओं ने साल 2022 में इसके मूल शीर्षक ‘पंजाब 95’ के नाम से सेंसर प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। उस दौरान सेंसर बोर्ड ने फिल्म के विषय को देखते हुए इसमें 127 कट लगाने का सुझाव दिया था। हालांकि, निर्माताओं ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया और तब से फिल्म की रिलीज रुकी हुई थी। आरोप है कि सुझाये गए संशोधनों पर कोई कानूनी या तकनीकी प्रक्रिया पूरी किए बिना मेकर्स ने फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रख दिया और इसे चुपचाप ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया।
सुरक्षा चिंताओं का हवाला, सरकार ने साफ की अपनी स्थिति
सूचना एवं प्रसारण से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आने वाला कंटेंट सीधे तौर पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, बल्कि इसे आईटी नियम, 2021 के भाग 3 के प्रावधानों के तहत रेगुलेट किया जाता है। जब बिना जरूरी बदलावों के फिल्म के स्ट्रीम होने का मामला सरकार के संज्ञान में आया, तो सुरक्षा और कानूनव्यवस्था की संभावित चिंताओं को देखते हुए जी5 को इसे तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्माता अपनी फिल्म को थिएटर या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित करना चाहते हैं, तो उन्हें तय नियमों और दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन करना होगा।



