
मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से रूह कंपा देने वाले एक पुराने हत्याकांड में अदालत ने अपना अहम फैसला सुनाया है। ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र की सिटी कॉलोनी में हुए जाविदा और उसके पति आबाद के सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में कोर्ट ने दोषी समीर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस खौफनाक वारदात की सबसे बड़ी चश्मदीद मृतका की 11 साल की बेटी सानिया थी, जिसने अपनी आंखों के सामने अपने ‘मामा’ (कातिल समीर) को अपने मां-बाप का गला रेतते देखा था। कोर्ट ने सानिया की पुख्ता गवाही के आधार पर ही कातिल को अंजाम तक पहुंचाया है। दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसका आधा हिस्सा पीड़ित बेटी को मिलेगा।
अवैध संबंधों में शक बना दोहरी हत्या की वजह
पुलिस की जांच और समीर के कबूलनामे से साफ हुआ था कि इस दोहरे हत्याकांड की जड़ में अवैध संबंध थे। सरूरपुर के गोटका गांव निवासी समीर के संबंध आबाद की पत्नी जाविदा के साथ थे। समय के साथ दोनों के रिश्तों में खटास आने लगी थी। जाविदा के घर किसी अन्य युवक का भी आना-जाना शुरू हो गया था, जो समीर को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं था। इसी खुन्नस में 20 सितंबर 2021 की रात समीर उनके घर मेहमान बनकर रुका और रात के अंधेरे में पशु काटने वाले दाव और चाकू से सो रहे दंपती पर ताबड़तोड़ वार कर उनकी निर्मम हत्या कर दी। जाविदा के पहले पति से जन्मी सानिया इस पूरी घटना की इकलौती चश्मदीद थी।
आंखों के सामने खून से लथपथ तड़प रहे थे मां-बाप
घटना वाली रात जब 11 वर्षीय सानिया की नींद टूटी, तो उसने जो मंजर देखा वह किसी बुरे सपने से कम नहीं था। सानिया आरोपी समीर को ‘मामा’ कहती थी। उसने देखा कि वही मामा उसके अम्मी-अब्बू का बेदर्दी से गला रेत रहा है। सानिया बचाव के लिए चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन सिरफिरे कातिल ने उसके सामने ही दोनों को खून से लथपथ कर मौत के घाट उतार दिया। बाद में मौके पर पहुंचे दरोगा प्रह्लाद सिंह ने हत्या में इस्तेमाल किए गए औजार भी बरामद किए थे।
जान के खतरे को देख असम से हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही
इस हाई-प्रोफाइल मामले में कुल 14 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए, लेकिन सबसे अहम गवाही सानिया की रही। घटना के बाद खौफजदा सानिया को उसकी सुरक्षा के मद्देनजर असम में उसके नाना-नानी के पास भेज दिया गया था। कोर्ट की सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सानिया ने मजिस्ट्रेट के सामने पूरी घटना बेबाकी से बयां की। अदालत ने अपने कड़े फैसले में कहा कि मेहमान बनकर घर आना और फिर चाकू-दाव से गला रेतकर हत्या करना एक बेहद गंभीर और समाज को झकझोरने वाला अपराध है।
फांसी होती तो ज्यादा सुकून मिलता…
सोमवार को जब अदालत का फैसला आया, तो मुकदमे के पैरोकार और पड़ोसी दिलशाद ने सानिया को फोन कर इसकी जानकारी दी। अपने मां-बाप के कातिल को उम्रकैद होने की बात सुनकर सानिया खुश तो हुई, लेकिन उसका दर्द भी छलक पड़ा। सानिया ने कहा, “अंकल, चार साल से हम इस दिन का इंतजार कर रहे थे। आज दिल को सुकून मिला है, लेकिन अगर उस कातिल को फांसी की सजा होती तो ज्यादा तसल्ली मिलती। मैं आज तक उस खौफनाक रात को भूल नहीं पाई हूं।”



