घरेलू शेयर बाजार में आज के कारोबारी सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सप्ताह के पिछले चार दिनों की तेजी के बाद बाजार में आया यह अचानक बदलाव निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 24,300 के स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार की इस सुस्ती के पीछे अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल को मुख्य कारक माना जा रहा है।

बाजार खुलने के कुछ ही देर बाद, सुबह 9:25 बजे तक सेंसेक्स 523.08 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,657.64 के स्तर पर ट्रेड करता हुआ दिखाई दिया। इसी तरह निफ्टी भी 159 अंकों की गिरावट के साथ 24,239.70 के स्तर पर आ गया। सेंसेक्स में शामिल 30 प्रमुख शेयरों में से 25 शेयरों में लाल निशान के साथ कारोबार शुरू हुआ। गिरावट का आलम यह रहा कि इंडिगो के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखी गई। इसके अलावा एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा स्टील और बजाज फिनसर्व जैसे दिग्गज शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। विपरीत दिशा में देखें तो सन फार्मा, एचसीएल टेक, टीसीएस, इन्फोसिस और ट्रेंट के शेयरों में मामूली तेजी का रुझान दिखा।
इस गिरावट का एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया में फिर से गहराया भूराजनीतिक संकट है। अमेरिका द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर हमला किए जाने और तेल की बिक्री पर सख्ती बरतने की खबरों ने वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर दी है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसमें ब्रेंट क्रूड 2.56 प्रतिशत बढ़कर 76.06 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। ब्रॉडर मार्केट में भी इसका असर स्पष्ट है, जहां निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी क्रमश: 0.39 प्रतिशत और 0.55 प्रतिशत नीचे फिसले हैं। सेक्टरवार प्रदर्शन में ऑयल एंड गैस क्षेत्र सबसे अधिक दबाव में दिखा, जबकि फार्मा सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बना रहा।
शेयर बाजार के साथसाथ मुद्रा बाजार पर भी इस वैश्विक तनाव का असर साफ है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 95.1725 के स्तर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 0.46 प्रतिशत की मजबूती के साथ 94.9675 पर बंद हुआ था, लेकिन आज की सुस्त शुरुआत ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में अस्थिरता का यह दौर बना रह सकता है।



