अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर घरेलू वायदा बाजार तक, दोनों कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. 8 जुलाई को एक ही दिन में चांदी करीब 6700 रुपये फिसल गई, जबकि सोने ने भी गोता लगाया है. इस बड़ी गिरावट के पीछे अमेरिकाईरान के बीच बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग और अमेरिकी डॉलर की मजबूती सबसे अहम वजहें हैं.

वायदा बाजार में औंधे मुंह गिरे दाम
भारत में कमोडिटी एक्सचेंज पर 8 जुलाई को बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला. सोने के वायदा भाव में 1.16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इससे सोना 1,692 रुपये टूटकर 1,43,710 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया. वहीं, चांदी ने गिरावट के पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए. सिल्वर फ्यूचर्स में 2.93 फीसदी की भयंकर गिरावट आई. नतीजतन, चांदी का भाव 6,763 रुपये लुढ़क कर 2,24,201 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया. ग्लोबल मार्केट में भी निराशा छाई है, जहां स्पॉट गोल्ड 1.1 फीसदी कमजोर होकर 4,061.32 डॉलर प्रति औंस पर आ गया और यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 2 फीसदी टूट गया.
अमेरिकाईरान विवाद बना वजह
सोनेचांदी के अचानक सस्ते होने की जड़ें अंतरराष्ट्रीय राजनीति में छिपी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ऐलान किया कि ईरान के साथ सीजफायर अब खत्म हो चुका है. इस खबर ने दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की बातचीत की संभावनाएं फिलहाल खत्म कर दी हैं. युद्ध की इस आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में एक झटके में 6 फीसदी से ज्यादा का उछाल आ गया.
कच्चा तेल महंगा होने का सीधा मतलब है दुनिया भर में महंगाई का बढ़ना. अब इस महंगाई को काबू में करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरें बढ़ाएगा. अर्थशास्त्र का सीधा नियम है कि जब भी डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की चमक फीकी पड़ने लगती है. आज देर रात फेड की मीटिंग के मिनट्स जारी होंगे, जिससे महंगाई को लेकर उनकी भावी रणनीति साफ होगी.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर मंडराता खतरा
बाजार में यह घबराहट बिना वजह नहीं है. लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में नरमी की असली वजह मध्यपूर्व में बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से बंद होने का खतरा मंडरा रहा है, जो दुनिया भर में तेलगैस की सप्लाई का सबसे अहम रास्ता है. अगर यह रास्ता बाधित हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतें और भड़केंगी. इसी डर से आज लगातार तीसरे दिन सोने में गिरावट आई है.
क्या आगे भारी गिरावट संभव है?
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ समय तक सोने पर दबाव जरूर दिख सकता है, लेकिन किसी बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है. कीमतें एक सीमित दायरे में ही ऊपरनीचे होंगी. इसका सबसे बड़ा कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, मई महीने में केंद्रीय बैंकों ने सोने में भारी निवेश किया है. मिसाल के तौर पर, तंजानिया के केंद्रीय बैंक ने पिछले 18 महीनों में करीब 28 टन सोना खरीदा है. यही बड़ी खरीदारी सोने के दाम को पूरी तरह क्रैश होने से बचा रही है.



