भारत की तीन सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनियां HPCL), BPCL और इंडियन ऑयल IOCL चालू वित्त वर्ष 202627 की पहली तिमाही में भारी नुकसान झेल सकती हैं। ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि इन तीनों कंपनियों का संयुक्त EBITDA घाटा करीब ₹47,700 करोड़ तक पहुंच सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, एलपीजी सिलेंडर पर बढ़ी अंडररिकवरी, रुपये की कमजोरी और पेट्रोलडीजल पर घटता मुनाफा है। कंपनियों को महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ा, लेकिन वे उसकी पूरी लागत ग्राहकों पर नहीं डाल सकीं, जिससे उनके मार्जिन पर भारी दबाव आया।

जापानी ब्रोकरेज नोमुरा का अनुमान है कि पहली तिमाही में HPCL को करीब ₹13,900 करोड़, BPCL को ₹15,800 करोड़ और IOCL को ₹17,300 करोड़ का EBITDA घाटा हो सकता है। वहीं, JM फाइनेंशियल का अनुमान इससे भी अधिक है, जिसके मुताबिक तीनों कंपनियों का कुल नुकसान ₹47,700 करोड़ तक पहुंच सकता है।
ब्रोकरेज का कहना है कि पेट्रोल और डीजल पर औसत मार्केटिंग मार्जिन घटकर ₹23.4 प्रति लीटर तक पहुंच गया, जबकि पिछली तिमाही में यह ₹0.7 प्रति लीटर था। एलपीजी सिलेंडर पर भी अंडररिकवरी तेजी से बढ़ी है। नोमुरा के मुताबिक प्रति सिलेंडर करीब ₹560 का नुकसान हो रहा है, जबकि JM फाइनेंशियल ने कुल LPG अंडररिकवरी ₹25,000 करोड़ तक रहने का अनुमान जताया है।
एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उनका मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों को राहत देने के लिए या तो फ्यूल की कीमतों में और बढ़ोतरी करनी होगी या सरकार को वित्तीय सहायता देनी पड़ सकती है।
फिलहाल, कंपनियों को रोजाना करीब ₹1,380 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। एक्सपर्ट के अनुसार, अगर पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तभी इन कंपनियों की कमाई में सुधार देखने को मिल सकता है।
शेयर बाजार में भी इस दबाव का असर दिख रहा है। साल 2026 में अब तक HPCL का शेयर करीब 23%, BPCL का 20% और IOCL का 17% तक टूट चुका है। एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में इन कंपनियों का प्रदर्शन काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और सरकार की फ्यूल प्राइस निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा। अगर क्रूड महंगा बना रहता है, तो तेल कंपनियों के लिए चुनौती और बढ़ सकती है।



