सरकार ने EPF Scheme 2026 लागू कर दी है, जिसने 1952 से लागू कर्मचारी भविष्य निधि योजना की जगह ले ली है. हालांकि, नई योजना आने के बाद कई कर्मचारियों के मन में यह सवाल है कि क्या अब उन्हें PF में पहले से ज्यादा योगदान करना होगा? इसका जवाब है नहीं. नई स्कीम में EPF के अनिवार्य योगदान के नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. कर्मचारी और नियोक्ता पहले की तरह ही तय नियमों के अनुसार योगदान करेंगे. हां, स्वैच्छिक भविष्य निधि के जरिए अतिरिक्त बचत का विकल्प पहले की तरह जारी रहेगा.

EPF और VPF में क्या है अंतर?
EPF नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए अनिवार्य रिटायरमेंट सेविंग्स स्कीम है. इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को योगदान देना होता है. दूसरी ओर, VPF एक वैकल्पिक सुविधा है. इसके तहत EPF सदस्य अपनी इच्छा से अनिवार्य योगदान से अधिक रकम PF खाते में जमा कर सकते हैं. इससे रिटायरमेंट के समय बड़ा फंड तैयार करने में मदद मिलती है.
कितना होगा EPF योगदान?
EPF Scheme 2026 के तहत कर्मचारी और नियोक्ता दोनों पहले की तरह बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 1212% EPF में जमा करेंगे. फिलहाल सरकार ने वेतन सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है. इसलिए जब तक नई अधिसूचना जारी नहीं होती, 15,000 रुपये प्रति माह की मौजूदा वेतन सीमा लागू रहेगी.
अगर किसी कर्मचारी की सैलरी 15,000 रुपये से अधिक है, तो सामान्य तौर पर EPF योगदान इसी तय सीमा तक किया जाएगा. हालांकि, यदि कर्मचारी और नियोक्ता दोनों सहमत हों, तो वास्तविक बेसिक सैलरी के आधार पर भी अधिक योगदान किया जा सकता है.
VPF में जमा कर सकते हैं अतिरिक्त पैसा
नई स्कीम में कर्मचारियों को VPF के जरिए अतिरिक्त बचत करने की सुविधा भी जारी रहेगी. कर्मचारी अपनी इच्छा के अनुसार अनिवार्य EPF योगदान से अधिक रकम VPF में जमा कर सकते हैं. अच्छी बात यह है कि VPF पर भी वही ब्याज मिलता है, जो EPF पर मिलता है.
हालांकि, VPF में कर्मचारी द्वारा किए गए अतिरिक्त योगदान के बराबर रकम जमा करना नियोक्ता के लिए अनिवार्य नहीं है. यदि कोई कंपनी चाहे, तभी वह अतिरिक्त योगदान कर सकती है.
जरूरत पड़ने पर VPF योगदान घटा या बंद भी कर सकते हैं
नई व्यवस्था की एक खास बात यह है कि कर्मचारी भविष्य में अपने VPF योगदान को कम या पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं. इसी तरह, अगर कोई नियोक्ता स्वेच्छा से अतिरिक्त योगदान कर रहा है, तो वह भी नियमों के तहत इसे कम या बंद कर सकता है.
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए कौनसा विकल्प बेहतर?
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि EPF हर नौकरीपेशा कर्मचारी के लिए रिटायरमेंट की मजबूत नींव है, क्योंकि इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान शामिल होता है. वहीं, जिन कर्मचारियों की नियमित आय है और जो भविष्य के लिए बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना चाहते हैं, उनके लिए VPF एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसमें EPF के बराबर ब्याज मिलता है और अतिरिक्त बचत का मौका भी मिलता है. इसलिए EPF और VPF के बीच चुनाव करते समय अपनी आय, खर्च और भविष्य की वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए.



