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अनिल अग्रवाल की कंपनी का बड़ा ऐलान, तेल-गैस में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी!

भारत को तेल और गैस के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ने बड़ा लक्ष्य तय किया है. कंपनी ने कहा है कि वह आने वाले समय में हर दिन 5 लाख बैरल तेल और गैस का उत्पादन करना चाहती है. कंपनी का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशों से तेल और गैस खरीदने पर निर्भरता कम होगी.

अनिल अग्रवाल की कंपनी का बड़ा ऐलान, तेल-गैस में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी!

इस समय भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल और गैस विदेशों से आयात करता है. इसका मतलब है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई में कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ता है.

भारत के पास तेल और गैस के बड़े भंडार

वेदांता का कहना है कि भारत के पास तेल और गैस के बड़े भंडार मौजूद हैं. कंपनी के मुताबिक, देश में लगभग 300 अरब बैरल के बराबर हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावना है. अगर इन संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खुद पूरा कर सकता है.

कंपनी ने कहा कि उसकी वेदांता ऑयल एंड गैस कैरिन यूनिट आधुनिक तकनीकों की मदद से नए तेल और गैस भंडार खोजने और पुराने क्षेत्रों से ज्यादा उत्पादन करने पर तेजी से काम कर रही है. इसके लिए एडवांस टेक्नोलॉजी और बेहतर ऑयल रिकवरी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा.

क्या बोले अनिल अग्रवाल?

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनना केवल एक सपना नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से बेहद जरूरी है. उनका कहना है कि देश में जितना ज्यादा तेल और गैस का उत्पादन होगा, उतना ही कम आयात करना पड़ेगा. इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और देश वैश्विक संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सकेगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है. साथ ही देश में कुशल इंजीनियर, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

गहरे समुद्र में नहीं हुई खोज

वेदांता के अनुसार, भारत के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अब तक तेल और गैस की पूरी तरह खोज नहीं की गई है. खासकर गहरे समुद्र और बेहद गहरे समुद्र वाले इलाकों में अभी भी बड़े अवसर मौजूद हैं. सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं. नेशनल डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन के तहत कई ऐसे समुद्री क्षेत्रों को खोज और उत्पादन के लिए खोला गया है, जहां पहले काम की अनुमति नहीं थी. सरकार का लक्ष्य इस दशक के अंत तक ऊर्जा क्षेत्र में करीब 500 अरब डॉलर के निवेश को आकर्षित करना है.

यहां काम कर रही वेदांता

वेदांता का मानना है कि भारत को लंबे समय तक ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार, उद्योग, उद्यमियों और नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों को मिलकर काम करना होगा. फिलहाल Vedanta Oil & Gas के पास राजस्थान, गुजरात, असम और आंध्र प्रदेश में 44 ऑनशोर और ऑफशोर ब्लॉक हैं. ये ब्लॉक करीब 47,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं, जहां पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के तेल और गैस संसाधनों की खोज और उत्पादन का काम किया जा रहा है.

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