मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. ईरान ने दावा किया है कि उसने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को अगली सूचना तक बंद कर दिया है. ईरान का कहना है कि एक जहाज तय किए गए रास्ते से हटकर जा रहा था और उसने अपना ट्रैकिंग सिस्टम भी बंद कर दिया था. इसके बाद उस जहाज पर कार्रवाई की गई और उसे रोक दिया गया.

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना के मुताबिक, कुछ अन्य जहाज भी बिना अनुमति वाले समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे थे. उन्हें रास्ता बदलने की चेतावनी दी गई, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया. इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट अगले आदेश तक बंद करने का फैसला लिया.
ईरान ने साथ ही अमेरिका को भी कड़ी चेतावनी दी है. ईरानी नौसेना ने कहा कि अगर ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई या हमला किया गया, तो उसका “बहुत सख्त जवाब” दिया जाएगा. इतना ही नहीं, ईरान ने यह भी कहा कि क्षेत्र में मौजूद दुश्मन देशों के सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है.
ईरान से क्या चाहता है अमेरिका?
दूसरी ओर, अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दे कि वह इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमले नहीं करेगा और सभी जहाजों को बिना किसी रोकटोक और बिना किसी शुल्क के आनेजाने की अनुमति देगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हाल के तनाव के बावजूद अमेरिका और ईरान बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सीजफायर अब समाप्त हो चुका है.
होर्मुज क्यों है इतना जरूरी?
होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के करीब 20% इसी रास्ते से होती थी. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. तेल महंगा होने का असर पेट्रोल, डीजल, गैस, हवाई यात्रा, माल ढुलाई और रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है. इससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है.
ईरानअमेरिका की बातचीत पर टिकीं नजरें
फिलहाल यह साफ नहीं है कि होरमुज स्ट्रेट कब तक बंद रहेगा. दुनिया की नजर अब ईरान, अमेरिका और अन्य देशों के बीच चल रही बातचीत पर टिकी है. अगर बातचीत सफल होती है, तो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को दोबारा खोला जा सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है.



