
Lakhimpur Kheri : उत्तर प्रदेश एसटीएफ की टीम ने लखीमपुर खीरी में बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों को ठगने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। टीम ने आवास विकास कॉलोनी स्थित किराए के मकान पर छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। मौके से 324 सिम कार्ड, 8 मोबाइल फोन, 6 एटीएम कार्ड, फिंगरप्रिंट स्कैनर मशीन, आधार और पैन कार्ड, फोनपे आईडी कार्ड, दो दोपहिया वाहन तथा 58 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। मामले में फरार एक अन्य आरोपी दीपक की तलाश की जा रही है।
एसटीएफ की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में निघासन क्षेत्र के रायपुर निवासी नीरज वर्मा, शारदा नगर क्षेत्र के बेलवा निवासी आदेश वर्मा, सीतापुर जिले के लहरपुर थाना क्षेत्र के रमपुरवा निवासी अभिषेक वर्मा तथा पढ़ुआ थाना क्षेत्र के बुचवा निवासी रविदीप कुमार शामिल हैं। वहीं, गिरोह का एक अन्य सदस्य दीपक निवासी लखनऊ फरार हो गया।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
एसटीएफ के उपनिरीक्षक पवन कुमार सिंह अपनी टीम के साथ साइबर अपराध की रोकथाम और सुरागरसी में निकले थे। इसी दौरान मुखबिर ने सूचना दी कि आवास विकास कॉलोनी में किराए के मकान में कुछ लोग साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। सूचना पर टीम ने मौके पर पहुंचकर दूसरी मंजिल पर बने कमरे में छापा मारा, जहां चार लोग मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों के साथ मिले। पुलिस को देखते ही सभी घबरा गए, जिसके बाद उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया गया।
भोले-भाले लोगों के नाम पर बनाते थे सिम और यूपीआई
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे गरीब और भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं या अधिक लाभ का लालच देकर उनके नाम पर सिम कार्ड एक्टिवेट कराते थे। इसके बाद उन सिमों को एनएसडीएल खाते से लिंक कर यूपीआई आईडी तैयार की जाती थी। इन्हीं यूपीआई और सिम का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और साइबर ठगी से आने वाले रुपये के लेनदेन के लिए किया जाता था।
आरोपियों ने बताया कि इस तरीके से वे अपने नाम और मोबाइल नंबर का उपयोग नहीं करते थे, जिससे किसी राज्य की पुलिस जांच भी वास्तविक अपराधियों तक आसानी से नहीं पहुंच पाती थी। साइबर ठगी से मिलने वाली रकम को सभी सदस्य आपस में बांट लेते थे।
मकान मालिक भी गिरोह में शामिल
पूछताछ में निघासन निवासी नीरज वर्मा ने स्वीकार किया कि उसने अपना मकान गिरोह के सदस्यों को किराए पर दिया था। इसके बदले वह किराया लेने के साथ ऑनलाइन गेमिंग से होने वाली कमाई में भी हिस्सा लेता था। उसे गेमिंग के नाम पर हर महीने नौ हजार रुपये भी मिलते थे।
324 सिम और कई दस्तावेज बरामद
एसटीएफ के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से कुल 324 सिम कार्ड बरामद हुए, जिनमें सक्रिय और निष्क्रिय दोनों प्रकार के सिम शामिल हैं। इसके अलावा 8 मोबाइल फोन, 6 एटीएम कार्ड, एक मार्को फिंगर मशीन, दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक फोनपे आईडी कार्ड, दो दोपहिया वाहन और 58 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए। बरामद सामान को सील कर कब्जे में ले लिया गया है।
वाहनों के दस्तावेज नहीं मिले
गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि साइबर अपराध के संचालन में दो मोटरसाइकिलों का भी उपयोग किया जाता था। दोनों वाहनों के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें सीज कर मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
एसटीएफ की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस फरार आरोपी दीपक की तलाश में जुटी है। साथ ही बरामद मोबाइल, सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कर साइबर ठगी के नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।



