सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी, मथुरा और संभल से जुड़े विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए एक स्पेशल लोक अदालत में भेजने का अहम फैसला किया है. ‘समाधान’ पहल के तहत, इन सभी मामलों की मुख्य सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 21, 22 और 23 अगस्त को होनी है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मथुरा की स्पेशल लोक अदालत में सुलह की कोशिशें की गई थीं.

हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचे को हटाने के बदले जमीन की अदलाबदली का प्रस्ताव दिया था. हालांकि, यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि मुस्लिम पक्ष लोक अदालत के सामने पेश नहीं हुआ, और अब यह मामला अगस्त में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लिस्टेड है. सुप्रीम कोर्ट अभी शाही जामा मस्जिद विवाद से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है. शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए कोर्ट ने निचली अदालत के स्तर पर सर्वे के आदेशों पर रोक लगा दी है. SC ने लोक अदालत के जरिए आपस में बैठकर बातचीत से समझौते की बात कही.
इससे पहले श्री कृष्ण जन्मभूमिशाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़ी स्पेशल लीव याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्थानीय लोक अदालत में सुलह की बातचीत हुई, लेकिन वह नाकाम रही. असल में, ईदगाह पक्ष कार्यवाही में शामिल होने के लिए अदालत में आया ही नहीं. नतीजतन, गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सुलह की बातचीत के नाकाम रहने का आदेश जारी किया गया.
हिंदू पक्षकार ने किए 18 मुकदमे दायर
श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि श्री कृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मस्जिद मामले को लेकर कुल 18 मुकदमे दायर किए गए हैं. इन सभी मामलों की सुनवाई अभी इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही है. हाल ही में, कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में सात स्पेशल लीव याचिकाएं दायर कीं, जिनमें यह प्रस्ताव दिया गया कि विवाद को दोनों पक्षों के बीच समझौते के जरिए सुलझाया जाए.
सुलह की कार्यवाही के दौरान मुस्लिम पक्ष नहीं हुआ पेश
इस मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने केस को मथुरा की एक स्पेशल लोक अदालत में ट्रांसफर कर दिया और निर्देश दिया कि समझौता करने की कोशिश की जाए. शनिवार को ADJ11 सुरेंद्र प्रसाद की अदालत में स्पेशल लोक अदालत में सुलह की कार्यवाही हुई. कार्यवाही के दौरान हिंदू पक्ष के वादी मौजूद थे, लेकिन मुस्लिम पक्ष पेश नहीं हुआ. नतीजतन, सुलह की बातचीत नाकाम रही.


