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दिग्गज कंपनी ITC का बड़ा दांव! ₹2,600 करोड़ में इस IT कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी

आईटी सेक्टर में इन दिनों एक बड़ी हलचल चल रही है. दिग्गज कंपनी आईटीसी की सहयोगी कंपनी ‘आईटीसी इन्फोटेक’ मिडसाइज आईटी कंपनी ‘हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज’ को खरीदने की रेस में सबसे आगे निकल गई है. फिलहाल दोनों कंपनियों के बीच इस डील के साइज, वैल्यूएशन और स्ट्रक्चर को लेकर बातचीत चल रही है, जिसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है. अगर यह सौदा पूरा होता है, तो शेयर बाजार के निवेशकों से लेकर आईटी सेक्टर तक, इसका बहुत बड़ा असर देखने को मिलेगा.

दिग्गज कंपनी ITC का बड़ा दांव! ₹2,600 करोड़ में इस IT कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी

कौन बेच रहा है हिस्सेदारी ?

इस पूरी डील के केंद्र में हैपिएस्ट माइंड्स के फाउंडर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अशोक सूटा हैं. आईटी इंडस्ट्री के जानेमाने नाम, 83 साल के अशोक सूटा अब अपनी कंपनी से हिस्सेदारी बेचने का मन बना चुके हैं. कंपनी में सीधे तौर पर उनकी 32 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है. वहीं, अगर अन्य प्रमोटर होल्डिंग्स को भी मिला लें, तो यह आंकड़ा 40 फीसदी के पार चला जाता है.

इसमें से करीब 11.8 फीसदी हिस्सा ‘अशोक सूटा मेडिकल रिसर्च एलएलपी’ के नाम पर है. शेयर बाजार में हैपिएस्ट माइंड्स के शेयर का भाव अभी 403 रुपये के आसपास चल रहा है. इस कीमत के हिसाब से सूटा की कुल हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 2,600 करोड़ रुपये बैठती है. नियम के मुताबिक, किसी भी समझौते में सबसे पहले सूटा की प्रमोटर हिस्सेदारी खरीदी जाएगी. इसके बाद सेबी के टेकओवर नियमों के तहत आम शेयरधारकों के लिए एक ओपन ऑफर भी लाया जाएगा.

ITC के लिए क्यों गेमचेंजर है यह डील?

अब सवाल उठता है कि आईटीसी यह कंपनी क्यों खरीदना चाहती है? दरअसल, अगर यह डील पूरी होती है, तो यह आईटीसी इन्फोटेक के लिए एक बहुत बड़ा कदम साबित होगा. कंपनी अपने डिजिटल इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले बिजनेस को तेजी से बढ़ाना चाहती है.

हैपिएस्ट माइंड्स के आने से आईटीसी को क्लाउड, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर्स में जबर्दस्त फायदा मिलेगा. साथ ही, दुनिया भर में उनके ग्राहकों की संख्या भी बढ़ेगी. अपनी इसी विस्तार नीति के तहत आईटीसी इन्फोटेक ने अक्टूबर 2024 में 485 करोड़ रुपये में क्लाउड सर्विस कंपनी ब्लेज़क्लैन टेक्नोलॉजीज का भी अधिग्रहण किया था.

IT सेक्टर में क्यों मची है अधिग्रहण की होड़?

साल 2011 में अशोक सूटा ने बेंगलुरु में हैपिएस्ट माइंड्स की शुरुआत की थी. पिछले एक दशक में इस कंपनी ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है. लेकिन अब आईटी इंडस्ट्री का पूरा माहौल बदल रहा है. वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, महामारी के बाद महंगी हुई ब्याज दरें और कंपनियों के घटते आईटी बजट ने इस सेक्टर के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ऊपर से नवंबर 2022 में जेनरेटिव एआई के आने के बाद से सॉफ्टवेयर नौकरियों को लेकर एक अलग ही चिंता का माहौल बना हुआ है.

इन्हीं सब वजहों से आईटी कंपनियां अब एकदूसरे से हाथ मिला रही हैं, ताकि वे एआई और डिजिटल इंजीनियरिंग में अपनी ताकत बढ़ा सकें और अपना दायरा फैला सकें. यह डील कोई अकेली नहीं है; पिछले महीने ही भारत की आठवीं सबसे बड़ी आईटी कंपनी पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने लगभग 1.3 अरब डॉलर में जर्मन कंपनी नागरो को खरीदा है. वहीं, कोफोर्ज ने भी 2.35 अरब डॉलर की भारी भरकम रकम चुकाकर अमेरिकी कंपनी एनकोरा का अधिग्रहण किया है.

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