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आपको ही नहीं, आपके बाद परिवार को भी मिलती है पेंशन, जानिए EPS के 5 छुपे हुए फायदे

एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम को न सिर्फ रिटायरमेंट के बाद पेंशन देने के लिए, बल्कि EPF सब्सक्राइबर के परिवार के मेंबर्स को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए भी बनाया गया है. इस स्कीम में कुछ शर्तों के साथ जीवनसाथी, बच्चों, नॉमिनी और यहां तक कि आश्रित मातापिता के लिए भी प्रावधान शामिल हैं. आइए आपको विस्तार से EPS स्कीम के तहत परिवार को मिलने वाले पांच अहम फायदों की जानकारी देते हैं…

आपको ही नहीं, आपके बाद परिवार को भी मिलती है पेंशन, जानिए EPS के 5 छुपे हुए फायदे

विधवा पेंशन

अगर EPS मेंबर सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो जीवित जीवनसाथी मासिक विधवा या विधुर पेंशन पाने का हकदार होता है. यह योग्य EPS मेंबर की मृत्यु के बाद दी जाती है. यह तब मिलती है जब मृतक जीवनसाथी ने EPF के दायरे में आने वाली संस्था में काम किया हो और नौकरी के दौरान मृत्यु हो गई हो या कम से कम एक महीने तक EPF में योगदान दिया हो. यह जीवनसाथी की मृत्यु या दोबारा शादी होने तक मिलती रहती है. अगर एक से ज्यादा योग्य विधवाएं हैं, तो पेंशन सबसे पहले सबसे बड़ी उम्र की विधवा को दी जाती है.

बच्चों की पेंशन

मृतक EPS मेंबर के बच्चों को विधवा पेंशन के अलावा मासिक पेंशन भी मिलेगी. यह एक बार में ज्यादा से ज्यादा दो योग्य बच्चों के लिए उपलब्ध है. यह बच्चे के 25 साल का होने तक दी जाती है. स्थायी विकलांगता वाले बच्चे स्कीम की शर्तों के अनुसार उम्र सीमा के बाद भी पेंशन पा सकते हैं.

अनाथ पेंशन

अगर कोई जीवित जीवनसाथी नहीं है, तो योग्य बच्चे मासिक अनाथ पेंशन पा सकते हैं. यह पेंशन एक बार में ज्यादा से ज्यादा दो योग्य बच्चों के लिए उपलब्ध है. यह बच्चे के 25 साल का होने तक दी जाती है.

नॉमिनी पेंशन

नॉमिनी पेंशन सीमित स्थितियों में उपलब्ध है, जब मृतक मेंबर का कोई योग्य जीवनसाथी या बच्चा न हो. यह मुख्य रूप से अविवाहित मेंबर्स या बिना योग्य परिवार वाले मेंबर्स पर लागू होती है. इस फायदे को पाने के लिए सही नॉमिनेशन जरूरी है. अगर मेंबर का बाद में कोई योग्य परिवार बन जाता है, तो स्कीम के तहत पिछला नॉमिनेशन अमान्य हो जाता है.

आश्रित मातापिता की पेंशन

ईपीएस स्कीम आश्रित मातापिता को भी सहायता देती है. यह तब आश्रित मातापिता के लिए आर्थिक सहायता सुनिश्चित करती है, जब परिवार का कोई अन्य योग्य लाभार्थी न हो. यह तभी उपलब्ध है जब कोई योग्य जीवनसाथी, बच्चा या सही नॉमिनी न हो. स्कीम के प्रावधानों के अनुसार, पेंशन सबसे पहले आश्रित पिता को और उसके बाद आश्रित माता को दी जाती है.

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