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‘H-1B वीजा धारक अमेरिकियों के लिए पैदा करते हैं नौकरियां’, अमेरिकी सांसद का बड़ा बयान

भारतीयअमेरिकी सांसद सुहास सुब्रह्मण्यम ने एच1बी वीजा धारकों द्वारा अमेरिकियों की नौकरियां छीनने के दावे को खारिज किया है।

‘H-1B वीजा धारक अमेरिकियों के लिए पैदा करते हैं नौकरियां’, अमेरिकी सांसद का बड़ा बयान

वाशिंगटन। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रह्मण्यम ने इस दावे को खारिज किया है कि एच1बी वीजा धारक अमेरिकियों से नौकरियां छीनते हैं। बल्कि उन्होंने तर्क दिया कि कई प्रवासी अमेरिका में कंपनियां स्थापित करते हैं और रोजगार सृजन करते हैं।

वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले डेमोक्रैट सांसद ने कहा कि यह कोई एकतरफा खेल नहीं है।

सुहास सुब्रह्मण्यम ने H1B वीजा धारकों का किया बचाव

भारतीय अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रह्मण्यम ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘बहुत से लोग जो एच1बी वीजा पर आते हैं, वे वास्तव में कंपनियां शुरू करते हैं, अमेरिकियों के लिए नौकरियां पैदा करते हैं।’

सुहास सुब्रह्मण्यम ने वीजा कार्यक्रम के बारे में चिंताओं को स्वीकारा और अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए सुधारों का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने अमेरिका को महत्वपूर्ण कार्यबल की कमी को दूर करने और ऐसे लोगों को आकर्षित करने में मदद की, जो बाद में नागरिक बन गए।

सुब्रह्मण्यम ने कहा, ‘कार्यक्रम में कुछ मुद्दे हैं जिन्हें हमें ठीक करने की आवश्यकता है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अमेरिकियों को नौकरियों का अवसर मिले। लेकिन अंत में एच1बी कार्यक्रम कार्यबल की कमी को भरने में सफल रहा है और आप जानते हैं, उनमें से कुछ भविष्य के अमेरिकियों में बदल गए और हमारे समाज में बहुत योगदान दे रहे हैं।’

भारतीय अमेरिकी सांसद ने कहा कि उनके वर्जीनिया निर्वाचन क्षेत्र में कई लोग एच1बी वीजा पर अमेरिका आए थे और बाद में नागरिक बन अपने समुदायों में योगदान दिया।

सुब्रह्मण्यम ने कहा, ‘मेरे समुदाय में बहुत से लोग हैं जो एच1बी वीजा धारक के रूप में शुरू हुए और अब नागरिक हैं और जो समुदाय को बहुत कुछ वापस दे रहे हैं। इसलिए हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम कार्यक्रम को बनाए रखें, इसे सुधारें, इसे बेहतर बनाएं और इस प्रक्रिया में अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा भी करें।’

सांसद ने प्रवासियों को व्यापक आर्थिक समस्याओं के लिए दोषी ठहराने के प्रयासों की भी आलोचना की। ध्यान रहे कि भारतीय लंबे समय से इसके लाभार्थियों का बड़ा हिस्सा हैं, विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और अन्य उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में।

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