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Shravan Rules: सावन में दाढ़ी-बाल कटवाना क्यों है वर्जित? जानिए इसके पीछे का ज्योतिषीय कनेक्शन और प्रभाव

Shravan Rules: सावन में दाढ़ी-बाल कटवाना क्यों है वर्जित? जानिए इसके पीछे का ज्योतिषीय कनेक्शन और प्रभाव
भगवान शिव को श्रवण मास सबसे प्रिय है। इस बार सावन का महीना 30 जुलाई से आरंभ होकर 28 अगस्त तक चलेगा। यह महीना भगवान भोलेनाथ की पूजाअर्चना करने के लिए विशेष शुभ माना जाता है। सावन के महीने में शिव भक्त सोमवार का व्रत करते हैं। 
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस पवित्र महीने में नियमित रुप से दैनिक दिनचर्या से संबंधित सभी नियमों का पालन करना  विशेष माना जाता है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो भगवान शिव रुष्ट भी हो जाते हैं। सावन के महीने में दैनिक दिनचर्या का एक नियम दाढ़ी और बाल कटवाने से संबंधित है।  
अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि सावन के महीने में दाढ़ी एवं बाल कटवाने चाहिए या नहीं। तो चलिए बिना देर किए आपको इस लेख में विस्तार से बताते हैं बाल कटवाना शुभ है या अशुभ।
क्या सावन में दाढ़ीबाल कटवाने चाहिए?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भूलकर भी सावन के महीने में दाढ़ी और बाल कटवाना नहीं चाहिए। पूरे महीने बाल व दाढ़ी कटाना वर्जित माना जाता है। खासकतर,जो लोग सोमवार का व्रत रखेंगे या फिर कांवड़ यात्रा में शामिल होंगे। इन लोगों को सावन के महीने में दाढ़ीबाल कटवाने जरुर बचें। इस दौरान इन नियमों को सख्ती से पालन करें। अगर आप नियमों का पालन नहीं करेंगे तो जीवन में अशुभ परिणाम प्राप्त होंगे। भगवान शिव नाराज हो जाते हैं, जिससे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस नियम को जरुर फॉलो करें।
जानें इसके पीछे का कारण
सावन का पवित्र महीना भगवान शंकर की पूजाअर्चना करने के लिए बेहद शुभ होता है। वैसे भी समय महादेव की तपस्या करने का होता है। इसलिए दाढ़ी और बाल कटवाने के लिए मना किया जाता है। माना जाता है कि सावन सोमवार व्रत के समय दाढ़ी और बाल कटवाने से व्रत टूट सकता है, जिससे साधक को पुण्य की प्राप्त नहीं होती है।
ज्योतिष शास्त्र में भी बताया गया है कि बालों की सुंदरता और चमक संबंध सुख, विवाह, प्रेम, सौंदर्य और कला के कारक  शुक्र ग्रह से होता है। मान्यता है कि सावन के महीने में दाढ़ीबाल कटवाने से व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर हो जाता है, जिस कारण से घर में दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा का वास हो जाता है। इतना ही नहीं व्यक्ति को आर्थिक तंगी और वैवाहिक जीवन में भी कलह का सामना करना पड़ता है। 

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