नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने राजधानी में वायु प्रदूषण कम करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वच्छ, हरित और विकसित भारत के विजन के अनुरूप दिल्ली में पीएम ईड्राइव योजना के फेजI के तहत 2,800 नई एसी लोफ्लोर इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जाएंगी। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रधानमंत्री जी के इसी विजन के अनुरूप सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करते हुए इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प वर्ष 202829 तक सार्वजनिक परिवहन बेड़े को लगभग 14,000 बसों तक बढ़ाने का है। ये बसें अगले वर्ष से दिल्ली की सड़कों पर उतरना शुरू हो जाएंगी।

इन बसों को शामिल करने का निर्णय हाल ही में दिल्ली कैबिनेट की बैठक में लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2,800 शून्यउत्सर्जन इलेक्ट्रिक बसों का शामिल होना दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के साथसाथ नागरिकों को अधिक सुविधाजनक, आधुनिक और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इन 2,800 इलेक्ट्रिक बसों में 1,400 बसें 12 मीटर लंबी और 1,400 बसें 9 मीटर लंबी होंगी। 9 मीटर लंबी बसें संकरी सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालन के लिए विशेष रूप से उपयोगी होंगी। इससे यात्रियों को मुख्य मार्गों से आगे अंतिम छोर तक बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और लास्टमाइल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
दिल्ली कैबिनेट की जानकारी के अनुसार सरकार ने पिछले वर्ष कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड को 2,800 इलेक्ट्रिक बसों की अपनी आवश्यकता भेजी थी। बाद में दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल इंटरकनेक्टर बसों के संचालन से मिले अनुभव के आधार पर बसों की आवश्यकता को संशोधित करते हुए 1,400 बारह मीटर और 1,400 नौ मीटर की समान संख्या में बसें शामिल करने का निर्णय लिया गया। 2,800 बसों को शामिल करने के लिए सीईएसएल द्वारा देशव्यापी प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे प्रतिस्पर्धी दरों पर बसों के संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
पीएम ईड्राइव फेजI के तहत इस परियोजना के लिए 12 मीटर की प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस पर 35 लाख रुपये अधिकतम और 9 मीटर की प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस पर 25 लाख रुपये अधिकतम की सरकारी वित्तीय सहायता का प्रावधान है। 2,800 बसों को ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल के तहत दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में शामिल किया जाएगा और उनका संचालन निर्धारित सेवा व्यवस्था के तहत होगा। सभी 2,800 बसों का संचालन दिल्ली परिवहन निगम द्वारा किया जाएगा। जीसीसी मॉडल के तहत बसों के संचालन और सेवा अनुबंध की अवधि 12 वर्ष होगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार अगले वर्ष, अप्रैल माह से इन आधुनिक बसों को दिल्ली की सड़कों पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। अगस्त 2028 तक बसों का पूरा बेड़ा राजधानी के सार्वजनिक परिवहन सिस्टम में शामिल हो जाएगा। बसों के प्रभावी संचालन और बेहतर रूट प्लानिंग के लिए आईआईटी दिल्ली के सहयोग से बस रूटों का युक्तिसंगत पुनर्गठन किया जाएगा। इसके माध्यम से विस्तारित इलेक्ट्रिक बस बेड़े की तैनाती को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। बस मैनेजमेंट सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीनों के उपयोग से बस संचालन की निगरानी, प्रबंधन और टिकटिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2,800 शून्यउत्सर्जन इलेक्ट्रिक बसों का शामिल होना दिल्ली सरकार के वर्ष 202829 तक सार्वजनिक बस बेड़े को लगभग 14,000 बसों तक विस्तारित करने के लक्ष्य को भी मजबूती देगा। इससे एक ओर दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान होगा।



