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Agra POCSO Case: डीएनए जांच में देरी और अदालत में कथित अमर्यादित व्यवहार पर ACP को कोर्ट ने किया तलब

Court Order Agra POCSO Case:  ताजनगरी आगरा से न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक गंभीर मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित एक महिला पुलिस अधिकारी के कथित अमर्यादित व्यवहार पर विशेष न्यायाधीश ने कड़ा रुख अपनाया है।

Agra POCSO Case: डीएनए जांच में देरी और अदालत में कथित अमर्यादित व्यवहार पर ACP को कोर्ट ने किया तलब
Agra POCSO Case: डीएनए जांच में देरी और अदालत में कथित अमर्यादित व्यवहार पर ACP को कोर्ट ने किया तलब

अदालत ने न केवल उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं, बल्कि उन्हें 24 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने का भी निर्देश दिया है। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस और विधिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।

4 जुलाई को डीएनए जांच की दी थी अनुमति प्रदान

मामला थाना ट्रांस यमुना क्षेत्र के दीपक विहार निवासी अर्पित बघेल के विरुद्ध दर्ज दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और अनुसूचित जातिजनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के मुकदमे से जुड़ा है। विवेचना के दौरान पीड़िता के गर्भवती होने की पुष्टि होने पर तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त छत्ता एवं विवेचक श्वेता वर्मा ने आरोपी का डीएनए परीक्षण कराने की अनुमति अदालत से मांगी थी। विशेष न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित रोहित शेखर बनाम एन.डी. तिवारी मामले का हवाला देते हुए 4 जुलाई 2026 को डीएनए जांच की अनुमति प्रदान कर दी थी।

विवेचक को 16 जुलाई को तलब किया

अदालती आदेश के अनुसार, अनुमति मिलने के बाद भी डीएनए जांच की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की गई। 15 जुलाई को दोबारा प्रार्थनापत्र दाखिल कर देरी का कारण केवल “राजकीय कार्य की व्यस्तता” बताया गया। इस पर अदालत ने स्पष्टीकरण के लिए विवेचक को 16 जुलाई को तलब किया।

कोर्ट के आदेश में उल्लेख है कि सुनवाई के दौरान जब विशेष न्यायाधीश ने देरी का कारण पूछा तो सहायक पुलिस आयुक्त ने कथित रूप से कहा, “हमें और भी काम रहते हैं, आपने हमें बुला लिया हम करा लेंगे डीएनए।” अदालत ने इस कथित टिप्पणी और व्यवहार को न्यायालय की गरिमा के प्रतिकूल तथा अशिष्ट माना।

BNSS की धारा 384 के अंतर्गत प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश

विशेष न्यायाधीश सोनिका चौधरी ने अपने आदेश में कहा कि वर्दी में मौजूद अधिकारी से अपेक्षित शासकीय मर्यादा और पुलिस प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया तथा न्यायालय के प्रति अनादर का प्रदर्शन किया गया। अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए की धारा 267 के तहत विचारणीय अपराध बताते हुए BNSS की धारा 384 के अंतर्गत प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया।

व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश

साथ ही आदेश की प्रति आगरा पुलिस आयुक्त को भेजते हुए निर्देश दिया गया है कि इस संवेदनशील मामले की विवेचना किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में कराई जाए, जिससे जांच की निष्पक्षता बनी रहे। अदालत ने संबंधित अधिकारी को 24 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने आचरण पर लिखित स्पष्टीकरण देने का अंतिम अवसर भी प्रदान किया है।

के इस सख्त रुख की चर्चा आगरा के विधिक और प्रशासनिक गलियारों में तेज है और इसे अदालत की गरिमा एवं न्यायिक मर्यादा बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।

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