Brij Bhushan Clarifies Statement On Hanumangarhi Namaz: भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने बुधवार को हनुमानगढ़ी को लेकर दिए अपने पहले के बयान पर सफाई देते हुए कहा कि नमाज हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नहीं बल्कि मंदिर परिसर के 52 बीघा क्षेत्र के भीतर अदा की गई थी। उन्होंने कहा कि उनके पहले के बयान को अधूरा समझा गया और उन्होंने केवल उस सवाल का जवाब दिया था, जिसमें मीडिया ने सीढ़ियों पर नमाज पढ़े जाने के बारे में पूछा था।

मीडिया के सवाल पर दी सफाई
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मीडिया ने उनसे सीधा सवाल किया था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी? इस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ कहा था।
उन्होंने कहा, “मीडिया का सवाल बहुत सीधा था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी। मैंने इसका साफ इनकार किया। हां, मुझे यह भी स्पष्ट करना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नहीं, लेकिन मंदिर परिसर के 52 बीघा क्षेत्र के भीतर या किसी संत के स्थान पर नमाज पढ़ी गई थी, यह अलग बात है। जब मुझसे सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने के बारे में पूछा गया तो मैं इस सवाल से ही हैरान था और मैंने साफ तौर पर इसे नकार दिया।”
हनुमानगढ़ी के निर्माण पर भी दिया स्पष्टीकरण
भाजपा नेता ने हनुमानगढ़ी के निर्माण को लेकर दिए अपने पुराने बयान पर भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि उनका यह कहना कि ‘हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था’ अधूरा बयान था और इसे ऐतिहासिक तथा धार्मिक संदर्भ में समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “मैंने कहा था कि इसका निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था, लेकिन वह पूरी बात नहीं थी। अगर ‘अयोध्या माहात्म्य’ को देखें तो भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि अयोध्या के मुख्य द्वार के उत्तर दिशा में भगवान हनुमान और दक्षिण दिशा में सुग्रीव विराजमान हैं। जब स्वयं भगवान शिव हनुमानगढ़ी के अस्तित्व का वर्णन करते हैं, तो यह किसी व्यक्ति द्वारा बनाई गई इमारत नहीं हो सकती। यह एक गढ़ी यानी किलेनुमा धार्मिक स्थल है।”
बयान के बाद तेज हुआ राजनीतिक विवाद
की यह सफाई ऐसे समय आई है, जब हनुमानगढ़ी से जुड़े उनके बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हनुमानगढ़ी के इतिहास और उसकी पवित्रता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है।
मुख्यमंत्री योगी ने भी उठाया था मुद्दा
इसी महीने राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अयोध्या दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा था। बीकापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी की पिछली सरकारों के दौरान हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।
ने कहा था, “क्या कोई जामा मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ करा सकता है? क्या समाजवादी पार्टी या कांग्रेस की कोई सरकार ऐसा कर सकती है? फिर उन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने देने जैसा पाप क्यों किया?”
2003 की घटना से जुड़ा है पूरा विवाद
यह पूरा विवाद वर्ष 2003 की उस घटना से जुड़ा है, जब हनुमानगढ़ी के पास नमाज पढ़े जाने के दावे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। अब बृजभूषण शरण सिंह के नए स्पष्टीकरण के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
IANS ऐजेंसी इनपुट



