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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर नहीं चल पाएंगे कांवड़ यात्री, यहां तैयार किए गए 21 वैकल्पिक मार्ग

गाजियाबाद। आगामी कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने इस बार बड़े बदलाव किए हैं। नए दिशानिर्देशों के तहत कांवड़ यात्रियों के दिल्लीमेरठ एक्सप्रेसवे पर चलने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए गाजियाबाद जिले में 21 वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं, जहाँ मरम्मत और व्यवस्थाओं का काम तेजी से चल रहा है।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर नहीं चल पाएंगे कांवड़ यात्री, यहां तैयार किए गए 21 वैकल्पिक मार्ग

शीर्ष अधिकारियों की बैठक में लिया गया फैसला
सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस वर्चुअल बैठक में उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा के प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के साथसाथ मंडलायुक्त, आईजी, डीआईजी और जिलाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि कांवड़ मार्गों पर गड्ढामुक्त सड़कें, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, सफाई और बैरिकेडिंग से जुड़े सभी कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरे किए जाएं।

एक्सप्रेसवे पर तैनात रहेंगे ‘एक्सप्रेसवे मित्र’
गाजियाबाद के एडीएम विकास कश्यप के अनुसार, जहां भी स्थानीय कांवड़ मार्ग एक्सप्रेसवे से जुड़ते हैं, वहां ‘एक्सप्रेसवे मित्र’ और पुलिस बल की तैनाती रहेगी ताकि कोई भी श्रद्धालु एक्सप्रेसवे पर न जा सके। शासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान आम जनता का यातायात भी प्रभावित न हो।

सुरक्षा का त्रिस्तरीय ढांचा: 1275 सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी
कांवड़ मार्ग की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। पूरे मार्ग को 3 सुपर जोन, 11 जोन और 24 सेक्टरों में विभाजित किया गया है।

निगरानी: 1275 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पलपल की गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।
पुलिस बल: 193 संवेदनशील स्थानों पर 1437 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी और 17 स्थायी बैरियर बनाए जाएंगे।
शिविर व स्वागत द्वार: श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए 157 कांवड़ शिविर और 12 स्वागत द्वार चिह्नित किए गए हैं।
100 किलोमीटर लंबी 21 सड़कों का सुंदरीकरण
नगर निगम और लोक निर्माण विभाग सहित विभिन्न एजेंसियां गाजियाबाद की लगभग 100 किलोमीटर लंबी 21 प्रमुख सड़कों को दुरुस्त करने में जुटी हैं, जिनसे प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु गुजरेंगे।

स्वास्थ्य सेवाएं और दूधेश्वरनाथ मंदिर में विशेष इंतजाम
कंट्रोल रूम व हेल्पडेस्क: मेरठ रेंज के मुख्य कंट्रोल रूम के अलावा 4 स्थानीय कंट्रोल रूम और 8 सहायता केंद्र बनाए जा रहे हैं।

मेडिकल सुविधा: आपात स्थिति से निपटने के लिए जिले के 29 अस्पतालों में 150 बेड आरक्षित किए गए हैं, जबकि 24 मोबाइल मेडिकल टीमें लगातार गश्त पर रहेंगी।
ग्रीन कॉरिडोर: ऐतिहासिक श्री दूधेश्वरनाथ मंदिर को बेहद संवेदनशील मानते हुए वहां श्रद्धालुओं के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’ और एक समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा।

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