
इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में भारत की हार के बाद टीम की रणनीति और कप्तानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व भारतीय बल्लेबाज हनुमा विहारी ने कप्तान शुभमन गिल के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि निर्णायक मुकाबले में टीम संयोजन और गेंदबाजी बदलाव बेहतर हो सकते थे।
बता दें कि लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे और अंतिम एकदिवसीय मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 27 रन से हराकर श्रृंखला अपने नाम कर ली। मेजबान टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 3 विकेट पर 387 रन बनाए, जो लॉर्ड्स के इतिहास का सबसे बड़ा एकदिवसीय स्कोर रहा। जवाब में रोहित शर्मा ने शानदार शतक लगाया, लेकिन भारतीय टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।
मौजूद जानकारी के अनुसार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट के कारण इस मुकाबले में नहीं खेल सके। उनकी गैरमौजूदगी में भारत चार तेज गेंदबाजों और केवल एक स्पिनर अक्षर पटेल के साथ मैदान में उतरा। ऐसे में कप्तान शुभमन गिल के पास गेंदबाजी में केवल पांच विकल्प ही उपलब्ध थे।
हनुमा विहारी ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि पांच गेंदबाजों के साथ उतरने का फैसला टीम पर भारी पड़ा। उनका कहना था कि जब सभी गेंदबाज रन खा रहे थे, तब कप्तान के पास कोई अतिरिक्त विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में क्षेत्ररक्षण सजाने और गेंदबाजों में बदलाव करने की रणनीति और बेहतर होनी चाहिए थी। विहारी के अनुसार शुभमन गिल एक बेहतरीन बल्लेबाज हैं, लेकिन कप्तानी के मामले में उन्हें अभी काफी सुधार करने की जरूरत है क्योंकि टीम को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।
गौरतलब है कि विहारी ने कुलदीप यादव को अंतिम एकादश से बाहर रखने के फैसले पर भी हैरानी जताई। उनका कहना था कि एकदिवसीय क्रिकेट में अनुभव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट की तैयारी के दौरान मैच जिताने वाले खिलाड़ियों पर भरोसा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीस ओवर के प्रारूप में युवा खिलाड़ियों को अवसर देना समझ में आता है, लेकिन पचास ओवर के खेल में अनुभवी खिलाड़ियों का महत्व अधिक होता है।
मुकाबले में इंग्लैंड की ओर से बेन डकेट ने 141 रन और जैकब बेथेल ने 91 रन की शानदार पारियां खेलीं, जिसकी बदौलत टीम विशाल स्कोर तक पहुंची। बता दें कि यह वर्ष 2018 के बाद पहली बार है जब भारत को इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और विश्व कप की तैयारियों को देखते हुए भारतीय टीम प्रबंधन को अपने टीम संयोजन और रणनीति पर गंभीरता से विचार करना होगा।



