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तुलसी पूजा का सही तरीका: जल चढ़ाते वक्त बोलें ये 2 मंत्र, बदल जाएगी किस्मत!..

तुलसी पूजा का सही तरीका: जल चढ़ाते वक्त बोलें ये 2 मंत्र, बदल जाएगी किस्मत!..

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत ही पवित्र माना जाता है और इसकी नियमित रूप से पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है और ये भगवान विष्णु को भी सबसे प्रिय है। इसी वजह से विष्णु पूजा में तुलसी के पत्तों को जरूर शामिल किया जाता है। रोज सुबह तुलसी को जल अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बरकत आती है। वहीं इससे घर की नकारात्मकता भी खत्म होती है। नियम के अनुसार अगर तुलसी में जल चढ़ाते वक्त सही मंत्र का जाप किया जाए को इसका महत्व और असर काफी बढ़ जाता है। जानिए तुलसी पर जल चढ़ाते हुए कौन सा मंत्र बोलना चाहिए और पूजा का सही तरीका क्या है। साथ ही जानें तुलसी से जुड़ी कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए।

तुलसी पर जल चढ़ाते वक्त बोलें ये मंत्र

धार्मिक मान्यता है कि जब भी तुलसी को जल चढ़ाया जाए तो उस दौरान इस मंत्र का जाप करना बहुत ही शुभ माना जाता है। नीचे पढ़ें ये मंत्र और उसका मतलब-

महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी।

आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

इस मंत्र का सिंपल सा मतलब है कि हे मां तुलसी आप हर तरह के सौभाग्य को बढ़ाने वाली हैं और सभी दुख, रोग और परेशानियों का नाश करती है। आपको मेरा बार-बार प्रणाम। अगर ये मंत्र याद करना या बोलना कठिन लगे तो इसकी जगह पर एक छोटा सा मंत्र भी बोला जा सकता है। कोशिश करें कि जल अर्पित करते वक्त ये मंत्र तीन बार बोला जाए। नीचे देखें ये दूसरा मंत्र-

इस समय करें तुलसी को जल अर्पित

तुलसी में जल अर्पित करने का सबसे सही समय सुबह का माना जाता है। सूर्योदय के बाद स्नान करके साफ कपड़े पहन लें औरइसके बाद पूरी श्रद्धा भावना के साथ तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें। इस बात का ध्यान रखें कि पूजा के दौरान आपका मन शांत रखें। जिस भी मंत्र का जाप करना हो आप पूरी श्रद्धा के साथ करें।

जल चढ़ाने का सही तरीका और दिशा

नियम के अनुसार तुलसी को जल तांबे के लोटे से चढ़ाना ही शुभ होता है। इस दौरान आपका चेहरा पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। जल अर्पित करते ही तुलसी मां को रोली और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद दीया जलाएं और तुलसी की परिक्रमा करें।

इन गलतियों से बचें

1. रविवार और एकादशी के दिन तुलसी में जल ना चढ़ाएं।

2. बिना स्नान किए तुलसी को ना छुएं।

3. तुलसी में जरूरत से ज्यादा पानी ना डालें।

4. तुलसी के पत्तों को बेवजह ना तोड़ें।

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