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Telecom Dark Patterns: टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर सख्ती की मांग, उपभोक्ताओं के हित में नए नियमों की तैयारी

नई दिल्ली

Telecom Dark Patterns: टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर सख्ती की मांग, उपभोक्ताओं के हित में नए नियमों की तैयारी

भारत में 5G सेवाओं के विस्तार और तेजी से बढ़ते डिजिटल उपभोग के बीच मोबाइल उपभोक्ताओं के अनुभवों को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने टेलीकॉम सेक्टर की डिजिटल कार्यप्रणाली पर बहस तेज कर दी है। कम्युनिटी प्लेटफॉर्म LocalCircles द्वारा किए गए देशव्यापी सर्वे के अनुसार, लगभग 81 प्रतिशत मोबाइल उपभोक्ताओं ने किसी न किसी रूप में ‘डार्क पैटर्न’ का सामना किया है। ये ऐसे डिजिटल डिजाइन या प्रक्रियाएं हैं जो उपभोक्ताओं को भ्रमित कर महंगे विकल्प चुनने, अतिरिक्त भुगतान करने या अनचाही सेवाएं लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। रिपोर्ट में मौजूदा नियमों को पर्याप्त नहीं बताते हुए नियामकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता जताई गई है।

341 जिलों के 74 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की राय पर आधारित सर्वे
LocalCircles ने यह सर्वे देश के 341 जिलों में 74,000 से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं के बीच किया। सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनाई जा रही कई प्रक्रियाओं को उपभोक्ता पारदर्शी नहीं मानते। संस्था का कहना है कि मौजूदा गाइडलाइन होने के बावजूद ऐसे मामलों पर प्रभावी निगरानी और कार्रवाई की जरूरत बनी हुई है। रिपोर्ट TRAI और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को भेजने की तैयारी भी की गई है।

सबसे ज्यादा शिकायत ‘बेटएंडस्विच’ पैटर्न की
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक शिकायत ‘बेटएंडस्विच’ डार्क पैटर्न को लेकर सामने आई। लगभग 79 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि उन्हें शुरुआत में कम कीमत या ज्यादा लाभ वाले रिचार्ज प्लान दिखाए गए, लेकिन भुगतान के समय वही प्लान उपलब्ध नहीं थे या उनकी जगह अधिक महंगे विकल्प प्रस्तुत किए गए। इससे उपभोक्ताओं को अपेक्षा से अधिक खर्च करना पड़ा।

बारबार नोटिफिकेशन और अनचाहे प्रमोशन से बढ़ी परेशानी
करीब 78 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ‘नैगिंग’ यानी बारबार आने वाले नोटिफिकेशन को बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि नोटिफिकेशन बंद करने के बाद भी रिचार्ज, प्लान अपग्रेड, ऐप डाउनलोड या प्रमोशनल ऑफर्स से जुड़े संदेश लगातार भेजे जाते हैं, जिससे उपयोगकर्ता अनुभव प्रभावित होता है।

रिचार्ज कीमत, ऑटो सब्सक्रिप्शन और अतिरिक्त शुल्क पर उठे सवाल
सर्वे में 59 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि अंतिम भुगतान के समय विज्ञापित कीमत से अधिक राशि देनी पड़ी क्योंकि बाद में प्रोसेसिंग या कन्वीनियंस फीस जोड़ दी गई। वहीं 53 प्रतिशत लोगों ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना सेवाएं पेड सब्सक्रिप्शन में बदल गईं। लगभग आधे प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि ट्रांजैक्शन पूरा करने के लिए उन्हें अतिरिक्त सेवाएं लेने या जरूरत से ज्यादा व्यक्तिगत जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रमुख टेलीकॉम प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए अनुभव
LocalCircles के अनुसार उपभोक्ताओं ने रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसे प्रमुख टेलीकॉम प्लेटफॉर्म पर भी ऐसे अनुभव साझा किए। इनमें रिचार्ज प्लान के लाभ बदल जाना, छिपे हुए बदलाव, बारबार लगने वाले सब्सक्रिप्शन शुल्क और प्रमोशनल सेवाएं बंद करने में कठिनाई जैसी शिकायतें शामिल हैं। रिपोर्ट में एयरटेल के कुछ Unlimited 5G प्लान में हॉटस्पॉट सुविधा पर सीमाओं को भी ‘फोर्स्ड एक्शन’ डार्क पैटर्न के उदाहरण के रूप में उल्लेख किया गया है। ये उपभोक्ताओं द्वारा साझा किए गए अनुभव हैं और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

TRAI और CCPA से सख्त नियमों की मांग
रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल सलाह या गाइडलाइन जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। LocalCircles ने मांग की है कि TRAI टेलीकॉम प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न रोकने के लिए स्पष्ट और अनिवार्य नियम लागू करे तथा CCPA भी इस क्षेत्र में सक्रिय निगरानी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। संस्था के अनुसार पिछले दो वर्षों में इस विषय पर उल्लेखनीय नियामकीय कार्रवाई सामने नहीं आई है।

डार्क पैटर्न क्या हैं? 

    बेटएंडस्विच : सस्ता या बेहतर प्लान दिखाकर भुगतान के समय महंगा प्लान ऑफर करना।
    नैगिंग : नोटिफिकेशन बंद करने के बाद भी लगातार रिचार्ज या प्रमोशनल संदेश भेजना।
    छिपे हुए शुल्क : अंतिम भुगतान के समय प्रोसेसिंग या कन्वीनियंस फीस जोड़ देना।
    ऑटो सब्सक्रिप्शन : उपयोगकर्ता की स्पष्ट सहमति के बिना पेड सेवा सक्रिय हो जाना।
    फोर्स्ड एक्शन : मुख्य सेवा का लाभ लेने के लिए अतिरिक्त विकल्प चुनने या अन्य शर्तें मानने के लिए मजबूर करना।
    अनावश्यक डेटा संग्रह : साधारण सेवा के लिए जरूरत से ज्यादा व्यक्तिगत जानकारी मांगना।
    प्रमोशनल ऑप्टआउट में कठिनाई: विज्ञापन या ऑफर बंद करने का विकल्प जटिल या अस्पष्ट होना।
    प्लान बेनिफिट में बदलाव: रिचार्ज के बाद प्लान के लाभ बदल जाना या सीमित कर दिया जाना।

 

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