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क्या आप जानते हैं हनुमान जी के अलावा कौन हैं 7 चिरंजीवी? जानिए सनातन धर्म का रहस्य..

क्या आप जानते हैं हनुमान जी के अलावा कौन हैं 7 चिरंजीवी? जानिए सनातन धर्म का रहस्य..

सनातन धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कुछ महान व्यक्तित्वों को चिरंजीवी अर्थात लंबे समय तक जीवित रहने का वरदान या विशेष स्थिति प्राप्त है। यह धार्मिक आस्था का विषय है और विभिन्न ग्रंथों में इनके बारे में अलग अलग विवरण मिलते हैं।

आइए जानते हैं उन आठ चिरंजीवियों के बारे में जिनका उल्लेख प्राचीन परंपराओं में मिलता है।

हनुमान जी

हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार और श्रीराम का परम भक्त माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रीराम ने उन्हें कलियुग तक धर्म की रक्षा और भक्तों की सहायता के लिए पृथ्वी पर रहने का आशीर्वाद दिया।

परशुराम

भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाने वाले परशुराम को भी चिरंजीवी माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वे भविष्य में भगवान कल्कि के गुरु बनेंगे।

महर्षि वेद व्यास

महर्षि वेद व्यास को वेदों के संकलन और महाभारत की रचना का श्रेय दिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि वे कलियुग के अंत तक विद्यमान रहेंगे।

अश्वत्थामा

गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को महाभारत के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारा श्राप मिलने की कथा प्रसिद्ध है। मान्यता है कि वे आज भी पृथ्वी पर भटक रहे हैं। यह एक धार्मिक विश्वास है।

कृपाचार्य

कौरवों और पांडवों के गुरु कृपाचार्य को भी चिरंजीवी माना जाता है। वे अपने ज्ञान और तप के लिए प्रसिद्ध हैं।

विभीषण

रावण के छोटे भाई विभीषण ने धर्म का साथ देकर भगवान श्रीराम की सहायता की थी। रामायण की मान्यता के अनुसार उन्हें लंका का राजा बनाया गया और दीर्घायु रहने का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

राजा बलि

राजा महाबलि दानवीर और पराक्रमी राजा माने जाते हैं। वामन अवतार की कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने उन्हें सुतल लोक का अधिपति बनाया और विशेष कृपा प्रदान की। केरल का प्रसिद्ध ओणम पर्व भी राजा बलि से जुड़ा हुआ है।

ऋषि मार्कण्डेय

ऋषि मार्कण्डेय भगवान शिव के महान भक्त माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र की साधना और शिव कृपा से उन्हें दीर्घायु और चिरंजीवत्व का वरदान प्राप्त हुआ।

चिरंजीवी कौन हैं

सनातन परंपरा में प्रचलित प्रसिद्ध श्लोक इस प्रकार है

अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः

कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः

सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्

जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जितः

इस श्लोक के अनुसार अश्वत्थामा राजा बलि वेद व्यास हनुमान विभीषण कृपाचार्य और परशुराम सात चिरंजीवी हैं तथा ऋषि मार्कण्डेय को आठवें चिरंजीवी के रूप में स्मरण किया जाता है।

महत्वपूर्ण सूचना

यह लेख सनातन धर्म की धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न ग्रंथों और परंपराओं में इनके विवरण में कुछ अंतर मिल सकते हैं। इन्हें आस्था और धार्मिक विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए।

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