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‘यह एक टाइम बम है, अब बात सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक नहीं रुकेगी…’, CJP का केंद्र को अल्टीमेटम

नई दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट परीक्षा विवाद को लेकर केंद्र सरकार को अब तक की सबसे बड़ी और सीधी चेतावनी दे डाली है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने इस पूरे विवाद की तुलना एक ‘टाइम बम’ से करते हुए कहा है कि देश के युवाओं और आम जनता में असंतोष की आग लगातार भड़क रही है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर चेताया कि सरकार अगर अब भी नहीं जागी, तो लोगों का यह गुस्सा केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसका दायरा बहुत बड़ा और व्यापक होने जा रहा है।

‘यह एक टाइम बम है, अब बात सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक नहीं रुकेगी…’, CJP का केंद्र को अल्टीमेटम

‘सरकार जितना इंतजार करेगी, गुस्सा सीधे पीएम की ओर मुड़ेगा’

इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए सीजेपी प्रवक्ता ने मौजूदा हालात की गंभीरता को सामने रखा और कहा कि यह कोई ऐसा सामान्य मामला नहीं है जिसे हफ्तों या महीनों तक टाला जा सके। पूरे देश में इस वक्त सड़कों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग जितना अधिक इंतजार करेंगे, जनता का असंतोष और गुस्सा उतना ही विकराल रूप लेगा। उन्होंने यहां तक दावा किया कि अब यह गुस्सा बहुत तेजी से प्रधानमंत्री की ओर मुड़ रहा है और सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि बहुत जल्द यह आंदोलन केवल धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रहेगा।

मुआवजे और केस वापसी पर सहमति, लेकिन इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों का जिक्र करते हुए आशुतोष रंका ने बताया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के अलावा नीट विवाद से प्रभावित सभी परिवारों के लिए उचित मुआवजे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी कानूनी मामलों को वापस लेने की मांग की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के दौरान इन दोनों प्रमुख मांगों पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। हालांकि, उन्होंने दो टूक शब्दों में यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं किया जाएगा। रंका के अनुसार, सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने भी शिक्षा मंत्री को पद से हटाए जाने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है और आश्वासन दिया है कि इस पूरे मामले को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष उठाया जाएगा।

पीएम मोदी के एक्टिव होने में लगे दो महीने, टाइमिंग पर उठाए सवाल

पेपर लीक मामले में सख्त कदम उठाने को लेकर प्रधानमंत्री के हालिया बयानों पर जोरदार पलटवार करते हुए सीजेपी नेता ने सरकार की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार और प्रधानमंत्री को इस बेहद संवेदनशील विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देने में लगभग दो महीने का लंबा समय क्यों लग गया? रंका ने तंज कसते हुए कहा कि पहले विरोध प्रदर्शन के बाद भी प्रधानमंत्री को बोलने के लिए 45 दिनों तक इंतजार करना पड़ा। नीट पेपर लीक होने के लगभग दो महीने बाद अब जाकर प्रधानमंत्री इस मामले में एक्टिव नजर आ रहे हैं, जो सरकार की गंभीरता पर बड़ा सवाल उठाता है।

मौजूदा शिक्षा मंत्री के रहते सुधार असंभव, अब यह बना देश का जन आंदोलन

पार्टी प्रवक्ता ने यह साफ किया है कि प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में तय जवाबदेही और बड़े स्तर पर ढांचागत सुधार चाहते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में यह संभव नहीं है। उनका सीधा तर्क है कि जब तक शिक्षा मंत्रालय की कमान उस व्यक्ति के हाथों में रहेगी जो इस पूरे संकट के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है, तब तक किसी भी तरह के सुधारों पर सार्थक चर्चा नहीं हो सकती। अपनी बात खत्म करते हुए रंका ने दावा किया कि अब यह आंदोलन केवल कॉकरोच जनता पार्टी के दायरे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश का एक विशाल जन आंदोलन बन चुका है, जहां जनता का बढ़ता गुस्सा सीधे तौर पर केंद्र सरकार को निशाना बना रहा है।

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