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TGT अंग्रेजी भर्ती विवाद: आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों पर एक्शन, आयोग ने विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई के दिए संकेत

TGT English Recruitment Controversy: सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक अंग्रेजी 2022 भर्ती परीक्षा में पाठ्यक्रम से बाहर प्रश्न पूछे जाने के मामले में अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने संकेत दिए हैं कि जिन विषय विशेषज्ञों ने परीक्षा के लिए आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न तैयार किए थे, उन्हें भविष्य में आयोग की किसी भी परीक्षा से डिबार किया जाएगा।

TGT अंग्रेजी भर्ती विवाद: आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों पर एक्शन, आयोग ने विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई के दिए संकेत
TGT अंग्रेजी भर्ती विवाद: आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों पर एक्शन, आयोग ने विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई के दिए संकेत

सिलेबस से बाहर से पूछे गए 29 प्रश्न

जानकारी के अनुसार, टीजीटी अंग्रेजी परीक्षा में कुल 125 प्रश्न पूछे गए थे, जिनमें से 29 प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर पाए गए। यह संख्या कुल प्रश्नों के 23 प्रतिशत से भी अधिक है। मामला सामने आने के बाद अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाया और इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद आयोग पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया।

संबंधित विषय विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू

बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से प्रस्तुत पक्ष में यह स्वीकार किया गया कि विवादित 37 प्रश्नों में से 29 प्रश्न विशेषज्ञ समिति ने वास्तव में आउट ऑफ सिलेबस माने हैं। इसके बाद आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विषय विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

सूत्रों के मुताबिक, आयोग का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से दोषी पाए जाने वाले विशेषज्ञों को भविष्य में आयोग के किसी भी प्रश्नपत्र निर्माण कार्य से अलग रखने की तैयारी की जा रही है।

हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी अभ्यर्थियों की निगाहें

उधर, इस पूरे मामले को लेकर अभ्यर्थियों की निगाहें अब में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आयोग को अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट करना होगा कि पाठ्यक्रम से बाहर इतने अधिक प्रश्न पूछे जाने की स्थिति कैसे उत्पन्न हुई और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है।

अब केवल अभ्यर्थियों की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भर्ती परीक्षाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और विशेषज्ञों की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। ऐसे में आगामी न्यायिक सुनवाई और आयोग की कार्रवाई पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं।

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