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Kanwar Yatra 2026: कभी कांवड़ियों को ‘अनपढ़’ कहा, अब इटावा में शिव मंदिर बना रहे अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पिछले कुछ दिनों से खुद को शिवभक्त साबित करने की होड़ में लगे हैं. वे इटावा में भव्य केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं. इतना ही नहीं, जो अखिलेश यादव अपनी सरकारों में कांवड़ियों पर पाबंदियों का चाबुक चलाते थे, वे पिछले कुछ समय से अचानक कांवड़ियों के लिए ‘स्पेशल कॉरिडोर’ बनाने की मांग करने लगे हैं. यही समाजवादी पार्टी का नया ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ है, जो सियासी मजबूरी से उपजा है.

Kanwar Yatra 2026: कभी कांवड़ियों को ‘अनपढ़’ कहा, अब इटावा में शिव मंदिर बना रहे अखिलेश यादव

दूसरी तरफ खुद को बताने वाले अखिलेश यादव और उनके नेताओं ने हमेशा कांवड़ियों को ‘अनपढ़’, ‘बेरोजगार’ और ‘नफरती’ बताकर सरेआम अपमानित किया है.

कांवड़ियों का अपमान नहीं भूले जा सकते

समाजवादी पार्टी की राजनीति हमेशा से तुष्टिकरण पर आधारित रही है. जुलाई 2025 में कांवड़ यात्रा के दौरान सपा नेताओं ने जहर उगला था. खुद पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं का मखौल उड़ाते हुए शिवभक्तों का सरेआम अपमान किया था.

अखिलेश यादव ने कांवड़ यात्रा पर बेहद व्यंग्यात्मक लहजे में तंज कसते हुए कहा था कि अगर सरकार को कांवड़ियों की सेवा करनी ही है, तो सीओ और एसडीएम जैसे अधिकारियों को उनकी सेवा में लगाया जाए और उनसे कांवड़ियों के पैर दबवाए जाएं.

उनका बयान था कि जब तक युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, वे इस तरह की गतिविधियों में भाग लेते रहेंगे और यह सरकार की विफलता का प्रतीक है.

इतना ही नहीं, सपा के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने कांवड़ परंपरा को खुलेआम गलत ठहराते हुए कहा था कि कांवड़ यात्रा बच्चों को पढ़ाई और विकास से विमुख करती है.

हद तो तब पार हो गई थी जब पूर्व सांसद एसटी हसन ने कांवड़ मार्ग पर दुकानदारों की पहचान उजागर करने वाले पारदर्शी सरकारी आदेश की तुलना सीधे आतंकवाद और पहलगाम जैसी घटनाओं से कर डाली थी.

योगी सरकार का ‘मेरठ मॉडल’

सपा नेता भले ही वातानुकूलित कमरों में बैठकर कांवड़ियों को ‘अनपढ़बेरोजगार’ समझें, लेकिन यूपी की योगी सरकार आस्था को पूरा सम्मान देती है.

सरकार कांवड़ परंपरा को सुव्यवस्थित, सहज और निर्विघ्न बनाने के लिए सफलतापूर्वक कार्य कर रही है. आज यूपी में शिवभक्तों के लिए ‘मेरठ मॉडल’ लागू है. पश्चिमी यूपी के मुख्य केंद्र मेरठ रेंज में 969 किलोमीटर लंबा कांवड़ मार्ग शिवभक्तों के लिए पूरी तरह सुरक्षित किया गया है. जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नदी और नहरों के किनारे 157 नावें और 139 प्रशिक्षित गोताखोर मुस्तैद किए गए हैं. सुरक्षा के लिए 128 बैरियर लगाए गए हैं और भीड़ प्रबंधन के लिए 4 नए अस्थायी पुलिस थाने भी बनाए गए हैं.

गाजियाबाद पहले से लाखों कांवड़ियों का सबसे व्यस्त पारगमन मार्ग है. ऐसे में, सपा राज में जहां कांवड़िये जर्जर तारों से अक्सर हादसों का शिकार होते थे, वहीं आज योगी सरकार ने गाजियाबाद में लगभग 90,000 बिजली के खंभों को पीवीसी कवर से सुरक्षित कर दिया है और सभी ट्रांसफार्मर पूरी तरह ढक दिए गए हैं.

शिवभक्तों के विश्राम के लिए जिले में लगभग 300 कांवड़ शिविर लगाए गए हैं. आपात स्थिति के लिए मार्ग पर 65 एम्बुलेंस चौबीस घंटे तैनात हैं और अस्पतालों में 250 से अधिक बेड आरक्षित रखे गए हैं.

इन सबके बीच राज्य स्तर पर 14 सूत्री एक्शन प्लान कड़ाई से लागू किया गया है. डीजे के लिए 10 फीट ऊंचाई और 12 फीट चौड़ाई के स्पष्ट मानक तय हैं.

कांवड़ यात्रा रूट की शुचिता को बरकरार रखने के लिए मांस, मदिरा की बिक्री पूरी तरह बैन है और किसी भी छद्म पहचान वाले विक्रेता को रूट के पास फटकने नहीं दिया जाएगा.

गूगल मैप्स से डिजिटल मैपिंग, ‘जीरो प्लास्टिक’ अभियान और पारदर्शी नेमप्लेट नीति लागू है. इतना ही नहीं, ड्रोन व कमांड कंट्रोल सेंटर के जरिए 24×7 लाइव निगरानी हो रही है. जाहिर है, इन कदमों ने प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के उपद्रव को बर्दाश्त न करने की योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ का साक्षात्कार करा दिया है.

नाथ कॉरिडोर से काशी विश्वनाथ तक

इसमें कोई शक नहीं है कि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में यह सब इसलिए हो पा रहा है क्योंकि यहां एक ऐसी डबल इंजन सरकार है जो ‘विरासत और विकास’ को लगातार नए आयाम दे रही है. इस सरकार की राजनीति सपा नेताओं की तरह कोरी जुमलेबाजी पर नहीं, बल्कि ठोस परिणामों पर केंद्रित है.

बरेली को ‘नाथ नगरी’ कहा जाता है, जहां काशी और अयोध्या की तर्ज पर करीब ₹60 करोड़ की लागत से भव्य ‘नाथ कॉरीडोर’ का निर्माण तेजी से जारी है. इसके तहत अलखनाथ, त्रिवटी नाथ, वनखंडी नाथ और धोपेश्वर नाथ मंदिरों को संवारा जा रहा है. वहां वैदिक लाइब्रेरी और ओपन थिएटर जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं.

सुशासन और सांस्कृतिक समन्वय का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि बरेली में कांवड़ यात्रा और विश्व प्रसिद्ध आला हजरत दरगाह के ‘उर्सएरज़वी’ की तारीखें एक साथ आ रही थीं. लेकिन, प्रशासन ने पूरी संवेदनशीलता के साथ आपसी सहमति से उर्स की तारीखों में बदलाव करवा दिया. इससे शहर की कानूनव्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द पूरी तरह बना रहेगा.

इतना ही नहीं, काशी विश्वनाथ धाम में भव्य कॉरिडोर बनने के बाद से हर सावन में शिवभक्तों की भारी भीड़ काशी में दर्शन के नए रिकॉर्ड बना रही है. करोड़ों दर्शनार्थी बिना किसी असुविधा के बाबा विश्वनाथ के सुगम दर्शन कर रहे हैं.

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